Babaji ki Sakhi Radha Soami Ji। भाग्य का खेल

Radha soami Babaji Ki Sakhi Dera Beas

🌷🙏राधा स्वामी जी 🌷🙏
  भाग्य का खेल

पुराने समय की बात है चमनलाल नाम का एक इंसान बहुत ही नेकी ओर ईमानदारी के साथ व प्रभु के चरणों मे प्रीति रखते हुए सारा दिन धूप में इधर-उधर घूम-फिर कर टूटा-फूटा सामान और कबाड़ जमा करता.. 
फिर शाम को उसे बड़े कबाड़ी की दुकान पर बेचकर पेट भरने लायक कमा लेता था।

एक दिन वह एक घर से पुराना सामान खरीद रहा था। घर के मालिक ने उसे एक पुराना पानदान भी दिया, जो उसने मोल-भाव करके एक रुपये में खरीद लिया।
कुछ आगे बढ़ने पर एक और घर ने उसे कुछ कबाड़ बेचा, लेकिन घर के मालिक को वह पानदान पसंद आ गया और उसने पांच रुपये में उसे खरीद लिया। 

लेकिन जब काफी कोशिश के बाद भी वह पानदान उससे नहीं खुला तो अगले दिन उसने उसे चमनलाल को वापस करके अपने पांच रुपये ले लिए।
शाम को बड़े कबाड़ी ने भी वह पानदान न खुलने के कारण उससे नहीं खरीदा। 
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अगले दिन रविवार था। रविवार को बाजार के चौंक पर चमनलाल पुराना सामान बेचता था।
वहां उससे कोई ग्राहक पांच रुपये देकर वह पानदान ले गया।

लेकिन अगले रविवार को वह ग्राहक वह पानदान उसे वापिस कर गया क्योंकि वह उससे भी नहीं खुला।
बार-बार पानदान उसी के पास पहुंच जाने के कारण चमनलाल को बहुत गुस्सा आया और उसने उसे जोर से जमीन पर पटककर दे मारा। 

अबकी पानदान खुल गया। पानदान के खुलते ही चमनलाल की आंखें खुली-की-खुली रह गईं।
उसमें से कई छोटे-छोटे बहुमूल्य हीरे छिटक कर जमीन पर बिखर गए थे।

अगले दिन प्रातः वह उसी घर में गया जहां से उसने पानदान खरीदा था। 
पता चला कि वे लोग मकान बेचकर किसी दूसरे शहर में चले गये हैं। 
चमनलाल ने उनका पता लगाने की कोशिश भी की लेकिन नाकामयाब रहा। 

बाद में चमनलाल उन हीरों को बेचकर संपन्न व्यापारी बन गया और सेठ चमनलाल कहलाने लगा।
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जब समय अच्छा आता है तो सब कुछ स्वयं ही हो जाता है आवश्यकता है तो इंसान को संयम और ईमानदारी के साथ ईश्वर के चरणों मे प्रीति रखते हुए अपने जीवन के पथ पर चलते रहने की। कहीं ऐसा न हो कि हम दुष्कर्मो से अपने आये हुए भाग्य को नाराज कर वापिस लौटा दें।

कहा भी गया है कि समय से पहले भाग्य से ज्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता। यही चमनलाल के साथ हुआ। 
वह तो किसी तरह उस पानदान से छुटकारा पाना चाह रहा था, जो बार-बार लौटकर उसी के पास आ जाता था। 

किस्मत बार-बार उसके दरवाजे पर दस्तक दे रही थी, तभी तो वह पानदान उसे कबाड़ी से सेठ बना गया...

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