देखने का नजरिया। Dekhne Ka Najariya। Radha Soami Sakhi

"देखने का नजरिया"


"परम मित्रों",  इस जीवन को देखने का आपका नजरिया बड़ा महत्व रखता है । आपका रवैया, Attitude, आपकी पकड़, आपकी समझ और आपकी दृष्टि ही सब कुछ बनाती और बिगाड़ती है । एक बार एक गरीब परिवार ने बड़ी मुश्किल से अपना एक कच्चा पक्का मकान बना लिया । गरीबी में ना समझी भी थी ; क्योंकि पहले कभी मकान बनाया ही नहीं था । अभी वह परिवार उस मकान में पहुंचा भी नहीं था कि पहली ही बारिश में वह मकान तो गिर गया ।
       बच्चों ने दूसरे गांव में अपने पिता को इस घटना की सूचना दी । बच्चे बोले कि हमारी तो अपने मकान में रहने की आशाएं ही मिट्टी हो गईं हैं ; अब हम क्या करेंगे ? लेकिन बच्चों के पिता ने गांव में आकर प्रसाद बांटा । उसने परमात्मा का धन्यवाद किया । वह बोला कि अगर आठ दिन बाद मेरा यह मकान गिरता, तो मेरा एक भी बच्चा जिंदा नहीं बचता । उसके बाद वह आदमी जिंदगी भर इस बात से खुश रहा कि मेरा बनाया हुआ मकान गिर गया ।
       मंसूर को सूली दी जा रही थी ; उसे तसीहे दे देकर मारा जा रहा था । दुनिया में ऐसी कठोर यातना किसी को भी नहीं दी गई । लेकिन मंसूर उस वक्त भी हंस रहा था । वह कह रहा था कि तुम्हारी नफरत मेरे प्रेम को नहीं मिटा सकती । मेरा प्रेम कायम है और कायम रहेगा । यही मेरी प्रार्थना है और यही मेरी इबादत है । भगत सिंह ने युवावस्था में मिली मौत को अपनी दुल्हन का नाम दिया था । यह जिंदगी को देखने व समझने का नजरिया ही है कि कुछ लोग मौत के सामने भी खुश रहे और हंसते हुए कुर्बान हो गए ।
       महापुरुषों के वचन हैं कि हम जिंदगी को जैसा देखते हैं, वैसे ही भाव हमारे भीतर पैदा हो जाते हैं । इसलिए जिंदगी के अंधेरे पक्ष को नहीं उजाले पक्ष को देखा करें ।


 दुखों के बाद मिलने वाले अनंत सुखों के स्वागत के लिए तैयार रहना चाहिए । निराशा, अविश्वास को त्याग कर सतगुरु की परम पावन सत्ता पर भरोसा रखना चाहिए । सतगुर की सेवा, सत्संग, सुमिरन और ध्यान को निष्ठापूर्वक अपनी प्रार्थना व इबादत बना लेना चाहिए । तब कृपालु सतगुरू का आशीर्वाद तुम्हें अवश्य मिल जाएगा।
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