Radha Soami Babaji Ki Sakhi। सांस जरूरी या परमात्मा।

Radha Soami Satsang Dera Beas Hindi Sakhiyan

एक समय की बात है। किसी महात्मा के पास एक लड़का आया और बोला कि मुझे भी परमात्मा से मिला दो मैं भी उसे देखना चाहता हूं।

महात्मा बोले," ये तेरे बस की बात नहीं है, तुझे अभी सिर्फ चाव है प्रेम नही।"

लड़का, " मैं कुछ नहीं जानता आप मुझे भी दिखाओ परमात्मा, मैं भी तो देखूं क्या है वो"

महात्मा, " बेटा ये कोई खेल नहीं है, इसमे खुद को गवाना पड़ता है"

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लड़का," कोई बात नही बाबा मैं तैयार हूं।"

महात्मा ," अच्छा, चलो पर तुम्हे खुद को भी त्यागना पड़ेगा याद रखना।"

लड़का," हां बाबा"

महात्मा उसको एक सरोवर में ले गए और बोले कि चलो स्नान करलो,
वो कुंड में उतर गया"

महात्मा ने उसकी गर्दन पकड़ कर उसे कुंड में डुबो दिया, वो छटपटाने लगा, बाहर निकाला तो बोला," मुझे सांस नही आ रही,
महात्मा बोले," ऐसे ही मिलेगा परमात्मा" और उसे फिर डुबो दिया।
दोबारा बाहर निकाला तो बोला," बस करो मेरी सांस नही आ रही"

महात्मा बोले, " अब बता सांस चाहिए या परमात्मा।
वो उखड़ी हुई सांस लेते हुए बोला ," सांस चाहिए।

महात्मा बोले," जब तुम्हारे लिए सांस से ज्यादा परमात्मा प्यारा हो जाये तो मेरे पास आ जाना"

यही हाल हमारा है। हम परमात्मा को पाना तो चाहते है पर कुर्बान कुछ नही करना चाहते। और बिना कुर्बानी के कभी परमात्मा कभी नही मिलता।
कुर्बान करना है तो इच्छाओं का करो, लालच का करो, काम क्रोध का करो, मोह का करो, अहंकार का करो। तब देखना तुम्हारा रास्ता कितना आसान हो जाता है।


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