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About Us

Lets talk About Us
Radha Soami is a spiritual organization deals with internal development of disciple under the guiadnce of spiritual teacher.
The present Master of Radha Soami Organizaion is Baba Gurinder Singh ji.
In the Indian language, Radha Soami means ‘lord of the soul’, satsang describes a group that seeks truth, and Beas refers to the town near which the main centre is located in northern India.
RSSB was established in India in 1891 and gradually began spreading to other countries. Today RSSB holds meetings in more than 90 countries worldwide.
The basis of every religion is spirituality. With the passage of time and changing social values, the basic spiritual teachings often become embellished with extra rules and rituals, and eventually take the shape of a formal religion. Despite its extensive outreach activities, RSSB tries to maintain the integrity of its spiritual core and preserve the simplicity of its teachings.  At the heart of the RSSB philosophy is a belief that there is a spiritual purpose to human life – to experience the divinity of God who resides in all of us. It is through this experience that we will realize the truth of the concept that there is only one God and we are all expressions of his love.
By performing the meditation practice according to the teacher's instructions, individuals can realize the presence of God within themselves. It is a solitary practice that is done in the quiet of one's own home. Members commit themselves to a way of life that supports spiritual growth while carrying out their responsibilities to family, friends and society. There are no rituals, ceremonies, hierarchies or mandatory contributions, nor are there compulsory gatherings. Members need not give up their cultural identity or religious preference to follow this path.

To build on the primary spiritual practice of meditation, members are vegetarian, abstain from alcohol, tobacco, and recreational drugs, and are expected to lead a life of high moral values. A vegetarian diet encourages respect and empathy for all life and acknowledges that there is a debt to be paid for taking any life unnecessarily. Abstaining from intoxicants improves ones ability to concentrate and calms the mind during meditation. Members are encouraged to be self-supporting and not be a burden on society. They are free to make their own choices in life and maintain any cultural or religious affiliations they choose. RSSB does not involve itself in the personal lives of its members.


With love-
RadhaSoamiSakhi.org

Comments

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    ReplyDelete
    Replies
    1. Thanx for ur kind words..
      Do u know hindi ???

      Delete

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कुर्बानी के बिना मालिक नहीं मिलता। Radha soami sakhi

संतों की एक सभा चल रही थी 

किसी ने एक दिन एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सकें

संतों की उस सभा के बाहर एक व्यक्ति खड़ा था. उसने गंगाजल से भरे घड़े को देखा तो उसे तरह-तरह के विचार आने लगे

वह सोचने लगा- अहा ! यह घड़ा कितना भाग्यशाली है !

एक तो इसमें किसी तालाब पोखर का नहीं बल्कि गंगाजल भरा गया और दूसरे यह अब सन्तों के काम आयेगा

संतों का स्पर्श मिलेगा, उनकी सेवा का अवसर मिलेगा. ऐसी किस्मत किसी किसी की ही होती है

       Also read - अल्लाह की मर्जी

घड़े ने उसके मन के भाव पढ़ लिए और घड़ा बोल पड़ा- बंधु मैं तो मिट्टी के रूप में शून्य पड़ा था

किसी काम का नहीं था. कभी नहीं लगता था कि भगवान् ने हमारे साथ न्याय किया है

फिर एक दिन एक कुम्हार आया. उसने फावड़ा मार-मारकर हमको खोदा और गधे पर लादकर अपने घर ले गया

वहां ले जाकर हमको उसने रौंदा. फिर पानी डालकर गूंथा. चाकपर चढ़ाकर तेजी से घुमाया, फिर गला काटा. फिर थापी मार-मारकर बराबर किया

बात यहीं नहीं रूकी. उसके बाद आंवे के आग में झोंक दिया जलने को

इतने कष्ट सहकर बाहर निकला तो गधे पर लादकर उसने मुझे बाजार में भेज …

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जो जो ब्यास नहीं जा सका वो सत्संग यहां पढ़ो जी। और अपने प्रिय जनो के साथ शेयर भी करो जी।

Published by- RadhaSoamiSakhi.org

बाबाजी ने स्टेज पर आते ही अपने स्वभाव अनुसार संगत को प्रणाम किया और संगत पर वो रूह को झझकोर देने वाली दृष्टि डाली।

प्रत्येक रूह उसके दर्शन को पाकर हर्षोल्लास से गदगद हो रही थी, जो कि संगत के चेहरे से साफ साफ देखा जा सकता था।



बाबाजी ने इस बार हुज़ूर तुलसी साहिब की ग़ज़ल " दिल का हुजरा साफ कर, जाना के आने के लिए" ली और बहुत ही खूबसूरत तरीके से व्याख्या की।



-सत्संग के कुछ अंश

शब्द- दिल का हुजरा साफ कर, जाना के आने के लिए। ध्यान गैरों का उठा उसके बिठाने के लिए।



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जानिए कैसे करना है भजन सिमरन। Radha soami sakhi

हम सबको भजन सिमरन करने का हुक्म है।
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3. रात को भोजन संयम से करना चाहिए ताकि ज्यादा नींद न आये और हम रात को भी सिमरन कर सकें।

4. खाना हमेशा शाकाहारी और हल्का फुल्का होना चाहिए, ताकि शरीर बीमारियों से बचा रहे।

5. किसी भी प्रकार के नशे का सेवन वर्जित है।

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7. अपने अन्दरूनी रहस्यों को कभी दूसरों को न बताएं, इससे आपकी ही दौलत कम होगी।

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