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Showing posts from January, 2019

Guru Angad Dev Ji ki sakhi । गुरु अंगद देव जी और रूप सिंह जी की साखी ‘शुकराना’

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रूप सिंह बाबा ने अपने गुरु अंगद देव जी की बहुत सेवा की । 20 साल सेवा करते हुए बीत गए। गुरु रूप सिंह जी पर प्रसन्न हुए और कहा मांगो जो माँगना है। रूप सिंह जी बोले गुरुदेव मुझे तो मांगने ही नहीं आता। गुरु के बहुत कहने पर रूप सिंह जी बोले मुझे एक दिन का वक़्त दो घरवाले से पूछ के कल बताता हूं। घर जाकर माँ से पूछा तो माँ बोली जमीन माँग ले। मन नहीं माना। बीवी से पुछा तो बोली इतनी गरीबी है पैसे मांग लो। फिर भी मन नहीं माना। छोटी बिटिया थी उनको उसने बोला पिताजी गुरु ने जब कहा है कि मांगो तो कोई छोटी मोटी चीज़ न मांग लेना। इतनी छोटी बेटी की बात सुन के रूप सिंह जी बोले कल तू ही साथ चल गुरु से तू ही मांग लेना। अगले दिन दोनो गुरु के पास गए। रूप सिंह जी बोले गुरुदेव मेरी बेटी आपसे मांगेगी मेरी जगह। वो नन्ही बेटी बहुत समझदार थी। रूप सिंह जी इतने गरीब थे के घर के सारे लोग दिन में एक वक़्त का खाना ही खाते। इतनी तकलीफ होने के बावजूद भी उस नन्ही बेटी ने गुरु से कहा: गुरुदेव मुझे कुछ नहीं चाहिए।
आप के हम लोगो पे बहुत एहसान है। आपकी बड़ी रहमत है। बस मुझे एक ही बात चाहिए कि, “आज हम दिन में एक बार ही खाना खाते हैं। अगर कभी आगे ए…

सत्संग बड़ा या तप। Satsang bada ya Tap

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।। सत्संग ।। ------ सत्संग बड़ा है या तप ------ एक बार विश्वामित्र जी और वशिष्ठ जी में इस बात‌ पर बहस हो गई,
कि सत्संग बड़ा है या तप? विश्वामित्र जी ने कठोर तपस्या करके ऋध्दी-सिध्दियों को प्राप्त किया था,
इसीलिए वे तप को बड़ा बता रहे थे। जबकि वशिष्ठ जी सत्संग को बड़ा बताते थे। वे इस बात का फैसला करवाने ब्रह्मा जी के पास चले गए। उनकी बात सुनकर ब्रह्मा जी ने कहा- मैं सृष्टि की रचना करने में व्यस्त हूं।
आप विष्णु जी के पास जाइये।
विष्णु जी आपका फैसला अवश्य कर देगें। अब दोनों विष्णु जी के पास चले गए।
विष्णु जी ने सोचा- यदि मैं सत्संग को बड़ा बताता हूं तो विश्वामित्र जी नाराज होंगे,
और यदि तप को बड़ा बताता हूं तो वशिष्ठ जी के साथ अन्याय होगा।
इसीलिए उन्होंने भी यह कहकर उन्हें टाल दिया,
कि मैं सृष्टि का पालन करने मैं व्यस्त हूं।
आप शंकर जी के पास चले जाइये। अब दोनों शंकर जी के पास पहुंचे।
शंकर जी ने उनसे कहा- ये मेरे वश की बात नहीं है।
इसका फैसला तो शेषनाग जी कर सकते हैं। अब दोनों शेषनाग जी के पास गए।
शेषनाग जी ने उनसे पूछा- कहो ऋषियों! कैसे आना हुआ। वशिष्ठ जी ने बताया- हमारा फैसला कीजिए,
कि तप बड़ा है या सत्संग ब…

जब लंगर में बीबी ने किसी और का झूठा खाया। Jab langar me Bibi me kisi ka jhutha khaya ।

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🙏 ब्यास लंगर में जब खाना (गुरुप्रसाद )दिया जाता है तो बार-बार Announcement की जाती है कि जितनी जरूरत हो उतना ही लिया जाए क्योंकि उस पर गुरु की दृष्टि पड़ी होती है और वैसे भी हमें अपने अन का निरादर नहीं करना चाहिए ।
एक बच्चा Handicap था ठीक से खाना भी नहीं खा सकता था, लंगर में बैठा था । खाना खाने की कोशिश कर रहा था, थोड़ी दूरी पर एक औरत यह सब देख रही थी । उसका मन दया से भर गया कि बच्चा बेचारा खाना नहीं खा सकता और बच्चे की जो लार मुंह से निकल निकल कर थाली में (सब्जी में) गिर रही थी, उस औरत ने उसके पास जाकर उस बच्चे को छोटे-छोटे टुकड़े रोटी के तोड़ कर मुंह में डाले, बेटा खा ले तुझ से खाया नहीं जाता ,कुछ खाना खाया कुछ थाली में रह गया जब वो टूटियों की तरफ जाने लगी तो सेवादारों ने पकड़ लिया ,अब वह बेचारी बर्तन धोने जा रही थी सेवादारों ने कहा कि इसे खा, खाने के बाद बर्तन धोना है खाली करके ।  औरत रोने लगी उसने बात समझाई यह बच्चा मेरा नहीं है, ये खाना नहीं सकता, खाने में इसकी मदद कर रही थी। ये बच्चा मेरा नहीं है । सेवादारों ने उसकी एक न सुनी और उसे कहा हम नहीं जानते तू झूठ बोल रही है तू खाना …

कर्म बड़ा या भाग्य | Karm Bada Ya Bhjagya | Radha Soami Sakhi

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इस कथा से जानिए कर्म बड़ा या भाग्य! इस दुनिया में कर्म को मानने वाले लोग कहते हैं भाग्य कुछ नहीं होता और भाग्यवादी लोग कहते हैं किस्मत में जो कुछ लिखा होगा वही होकर रहेगा। यानी इंसान कर्म और भाग्य इन 2 बिंदुओं की धुरी पर घूमता रहता है और एक दिन इस जग को अलविदा कहकर चला जाता है।

भाग्य और कर्म को अच्छे से समझने के लिए पुराणों में एक कहानी का उल्लेख मिलता है। एक बार देवर्षि नारद जी बैकुंठ धाम गए। वहां उन्होंने भगवान विष्णु का नमन किया। नारद जी ने श्रीहरि से कहा, ‘‘प्रभु! पृथ्वी पर अब आपका प्रभाव कम हो रहा है। धर्म पर चलने वालों को कोई अच्छा फल नहीं मिल रहा, जो पाप कर रहे हैं उनका भला हो रहा है।’’



तब श्रीहरि ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है देवर्षि जो भी हो रहा है सब नियति के जरिए हो रहा है।’’

नारद बोले, ‘‘मैं तो देखकर आ रहा हूं, पापियों को अच्छा फल मिल रहा है और भला करने वाले, धर्म के रास्ते पर चलने वाले लोगों को बुरा फल मिल रहा है।’’



भगवान ने कहा, ‘‘कोई ऐसी घटना बताओ। नारद ने कहा अभी मैं एक जंगल से आ रहा हूं। वहां एक गाय दलदल में फंसी हुई थी। कोई उसे बचाने वाला नहीं था। तभी एक चोर उधर स…