Kahani Shakir aur Faqeer ki | शाकिर और फकीर की कहानी।

🙏🙏 एक फकीर अरब मे हज के लिए पैदल निकला। रात हो जाने पर एक गांव मे शाकिर नामक व्यक्ति के दरवाजे पर रूका। शाकिर ने फकीर की खूब सेवा किया। दूसरे दिन शाकिर ने बहुत सारे उपहार दे कर बिदा किया। फकीर ने दुआ किया -"खुदा करे तू दिनों दिन बढता ही रहे..🙏🙏 🙏🙏 सुन कर शाकिर हंस पड़ा और कहा -"अरे फकीर! जो है यह भी नहीं रहने वाला है"। यह सुनकर फकीर चला गया..🙏🙏 🙏🙏 दो वर्ष बाद फकीर फिर शाकिर के घर गया और देखा कि शाकिर का सारा वैभव समाप्त हो गया है। पता चला कि शाकिर अब बगल के गांव में एक जमींदार के वहां नौकरी करता है। फकीर शाकिर से मिलने गया। शाकिर ने अभाव में भी फकीर का स्वागत किया। झोपड़ी मे फटी चटाई पर बिठाया । 🙏

Saakhi- क्या हुआ जब मोची से भगवान ने मिलने का वादा किया

🙏 🙏🙏 खाने के लिए सूखी रोटी दिया.. दूसरे दिन जाते समय फकीर की आखों मे आंसू थे। फकीर कहने लगा अल्लाह ये तूने क्या किया? शाकिर पुनः हंस पड़ा और बोला -"फकीर तू क्यों दुखी हो रहा है? महापुरुषों ने कहा है -"खुदा इन्सान को जिस हाल मे रखे खुदा को धन्यवाद दे कर खुश रहना चाहिए।समय सदा बदलता रहता है और सुनो यह भी नहीं रहने वाला है..🙏🙏 🙏🙏 फकीर सोचने लगा -"मैं तो केवल भेस से फकीर हूं सच्चा फकीर तो शाकिर तू ही है..🙏🙏
🙏🙏 दो वर्ष बाद फकीर फिर यात्रा पर निकला और शाकिर से मिला तो देख कर हैरान रह गया कि शाकिर तो अब जमींदारो का जमींदार बन गया है। मालूम हुआ कि हमदाद जिसके वहां शाकिर नौकरी करता था वह संतान विहीन था मरते समय अपनी सारी जायदाद शाकिर को दे गया..🙏🙏 🙏🙏 फकीर ने शाकिर से कहा - "अच्छा हुआ वो जमाना गुजर गया। अल्लाह करे अब तू ऐसा ही बना रहे यह सुनकर शाकिर फिर हंस पड़ा और कहने लगा - "फकीर! अभी भी तेरी नादानी बनी हुई हैं..🙏🙏 🙏🙏 फकीर ने पूछा क्या यह भी नही रहने वाला है? शाकिर ने उत्तर दिया -"या तो यह चला जाएगा या फिर इसको अपना मानने वाला ही चला जाएगा। कुछ भी रहने वाला नहीं है। और अगर शाश्वत कुछ है तो वह है परमात्मा और इसका अंश आत्मा। 🙏🙏 🙏🙏 "फकीर चला गया..🙏🙏 🙏🙏 डेढ साल बाद लौटता है तो देखता है कि शाकिर का महल तो है किन्तु कबूतर उसमे गुटरगू कर रहे हैं। शाकिर कब्रिस्तान में सो रहा है। बेटियां अपने-अपने घर चली गई है।बूढी पत्नी कोने मे पड़ी है..🙏🙏 🙏🙏कह रहा है आसमां यह समां कुछ भी नहीं🙏🙏 🙏🙏रो रही है शबनमे नौरंगे जहाँ कुछ भी नहीं🙏🙏 🙏🙏जिनके महलों मे हजारो रंग के जलते थे फानूस🙏🙏 🙏🙏झाड़ उनके कब्र पर बाकी निशां कुछ भी नहीं🙏🙏 🙏🙏 फकीर सोचता है -"अरे इन्सान ! तू किस बात का अभिमान करता है? क्यों इतराता है? यहां कुछ भी टिकने वाला नहीं है दुख या सुख कुछ भी सदा नहीं रहता..🙏🙏 🙏🙏 तू सोचता है - "पड़ोसी मुसीबत मे है और मैं मौज में हूं। लेकिन सुन न मौज रहेगी और न ही मुसीबत। सदा तो उसको जानने वाला ही रहेगा..🙏🙏 🙏🙏"सच्चे इन्सान हैं वे जो हर हाल मे खुश रहते हैं..🙏🙏 🙏🙏 मिल गया माल तो उस माल मे खुश रहते हैं..🙏🙏 🙏🙏 हो गये बेहाल तो उस हाल मे खुश रहते हैं..🙏🙏 🙏🙏 धन्य है शाकिर तेरा सत्संग और धन्य हैं तुम्हारे सद्गुरु। मैं तो झूठा फकीर हूं। असली फकीर तो तेरी जिन्दगी है..🙏🙏 🙏🙏 अब मैं तेरी कब्र देखना चाहता हूं। कुछ फूल चढा कर दुआ तो मांग लूं..🙏🙏 🙏🙏 फकीर कब्र पर जाता है तो देखता है कि शाकिर ने अपनी कब्र पर लिखवा रखा है..🙏🙏 🙏🙏"आखिर यह भी तो नहीं रहेगा"🙏🙏 🙏🙏 वाहेगुरु आपका लख लख शुकराना.....🙏


Kya Hua Jab Bhagwan Ne Mochi Se Milne Ka Wada Kiya | Radha Soami Sakhi

Superb Sakhi

एक  समय  मोची  का  काम  करने  वाले  व्यक्ति  को रात  में  भगवान  ने  सपना दिया  और  कहा  कि  कल सुबह  मैं  तुझसे  मिलने  तेरी दुकान  पर  आऊंगा

मोची  की  दुकान  काफी छोटी  थी  और  उसकी आमदनी  भी  काफी  सीमित थी। खाना  खाने  के  बर्तन  भी  थोड़े  से  थे। इसके बावजूद  वो  अपनी  जिंदगी  से  खुश  रहता  था

एक  सच्चा, ईमानदार  और परोपकार  करने  वाला  इंसान  था। इसलिए  ईश्वर  ने उसकी  परीक्षा  लेने  का  निर्णय  लिया

मोची  ने  सुबह  उठते  ही तैयारी  शुरू  कर  दी। भगवान  को  चाय  पिलाने  के लिए  दूध, चायपत्ती  और नाश्ते  के  लिए  मिठाई  ले आया। दुकान  को  साफ  कर वह  भगवान  का  इंतजार करने  लगा। उस  दिन  सुबह से  भारी  बारिश  हो  रही  थी। थोड़ी  देर  में  उसने  देखा  कि  एक  सफाई  करने वाली  बारिश  के  पानी  में भीगकर  ठिठुर  रही  है
मोची  को  उसके  ऊपर  बड़ी दया  आई  और  भगवान  के लिए  लाए  गये  दूध  से उसको  चाय  बनाकर पिलाई


दिन  गुजरने  लगा। दोपहर बारह  बजे  एक  महिला  बच्चे  को  लेकर  आई  और कहा  कि  मेरा  बच्चा  भूखा  है  इसलिए  पीने  के  लिए  दूध  चाहिए। मोची  ने  सारा दूध  उस  बच्चे  को  पीने  के लिए  दे  दिया। इस  तरह  से शाम  के  चार  बज  गए। मोची  दिनभर  बड़ी  बेसब्री से  भगवान  का  इंतजार करता  रहा

तभी  एक  बूढ़ा  आदमी  जो चलने  से  लाचार  था  आया और  कहा  कि  मै  भूखा  हूं और  अगर  कुछ  खाने  को मिल  जाए  तो  बड़ी मेहरबानी  होगी। मोची  ने उसकी  बेबसी  को  समझते हुए  मिठाई  उसको  दे  दी। इस  तरह  से  दिन  बीत  गया और  रात  हो  गई
रात  होते  ही  मोची  के  सब्र का  बांध  टूट  गया  और  वह भगवान  को  उलाहना  देते हुए  बोला  कि "वाह  रे भगवान  सुबह  से  रात  कर दी  मैंने  तेरे  इंतजार  में लेकिन  तू  वादा  करने  के बाद  भी  नहीं  आया। क्या  मैं गरीब  ही  तुझे  बेवकूफ बनाने  के  लिए  मिला  था

तभी  आकाशवाणी  हुई  और भगवान  ने  कहा  कि " मैं आज  तेरे  पास  एक  बार नहीं, तीन  बार  आया  और तीनों  बार  तेरी  सेवाओं  से बहुत  खुश  हुआ। और  तू मेरी  परीक्षा  में  भी  पास हुआ  है, क्योंकि  तेरे  मन  में परोपकार  और  त्याग  का भाव  सामान्य  मानव  की सीमाओं  से  परे  हैं

इस  कहानी  से  हमको  यह शिक्षा  मिलती  है  कि  किसी भी  मजबूर  या  ऐसा  व्यक्ति जिसको  आपकी  मदद  की जरूरत  है  उसकी  मदद जरूर  करना  चाहिए। क्योंकि  शास्त्रों  में  कहा  गया  है  कि 'नर  सेवा  ही नारायण  सेवा  है'। और  मदद की  उम्मीद  रखने  वाले, जरूरतमंद  और  लाचार लोग  धरती  पर  भगवान  की तरह  होते  हैं। जिनकी  सेवा से  सुकून  के  साथ  एक अलग  संतुष्टी  का  एहसास होता  है