Behtareen Jeevan Ki Chabi | बेहतरीन जीवन दर्शन की चाबी


जरूर पढ़ना है, चाहे 5 मिनट लगें 👇🏾👇🏾👇🏾👇🏾👇🏾👇🏾👇🏾

एक बेहतरीन जीवन-दर्शन का अग्रेषित मैसेज….!😊
क्या हम बिल्डर्स, इंटीरियर डिजाइनर्स, केटरर्स और डेकोरेटर्स के लिए कमा रहे हैं ???
हम बड़े बड़े क़ीमती मकानों और बेहद खर्चीली शादियों से किसे इम्प्रेस करना चाहते हैं ???
क्या आपको याद है कि, दो दिन पहले किसी की शादी पर आपने क्या खाया था ???
जीवन के प्रारंभिक वर्षों में क्यों हम पशुओं की तरह काम में जुते रहते हैं ???
कितनी पीढ़ियों के खान पान और लालन पालन की व्यवस्था करनी है हमें ???
हम में से अधिकाँश लोगों के दो बच्चे हैं। बहुतों का तो सिर्फ एक ही बच्चा है। और सारे सक्षम योग्य साबित होंगें !
हमारी जरूरत कितनी हैं और हम पाना कितना चाहते हैं ???
इस बारे में सोचिए।
क्या हमारी अगली पीढ़ी कमाने में सक्षम नहीं है जो, हम उनके लिए ज्यादा से ज्यादा सेविंग कर देना चाहते हैं !?!
क्या हम सप्ताह में डेढ़ दिन अपने मित्रों, अपने परिवार और अपने लिए स्पेयर नहीं कर सकते ???
क्या आप अपनी मासिक आय का 5 % अपने आनंद के लिए, अपनी ख़ुशी के लिए खर्च करते हैं ???
*सामान्यतः जवाब नहीं में ही होता है।
हम कमाने के साथ साथ आनंद भी क्यों नहीं प्राप्त कर सकते ???
इससे पहले कि आप स्लिप डिस्क्स का शिकार हो जाएँ, इससे पहले कि, कोलोस्ट्रोल आपके हार्ट को ब्लॉक कर दे, आनंद प्राप्ति के लिए समय निकालिए !!!
हम किसी प्रॉपर्टी के मालिक नहीं होते, सिर्फ कुछ कागजातों, कुछ दस्तावेजों पर अस्थाई रूप से हमारा नाम लिखा होता है।
ईश्वर भी व्यंग्यात्मक रूप से हँसेगा जब कोई उसे कहेगा कि, ” मैं जमीन के इस टुकड़े का मालिक हूँ ” !!
किसी के बारे में, उसके शानदार कपड़े और बढ़िया कार देखकर, राय कायम मत कीजिए।
*हमारे महान गणित और विज्ञान के शिक्षक स्कूटर पर ही आया जाया करते थे !!
*धनवान होना गलत नहीं है बल्कि सिर्फ धनवान होना गलत है।
*आइए जिंदगी को पकड़ें, इससे पहले कि, जिंदगी हमें पकड़ ले…
*एक दिन हम सब जुदा हो जाएँगे, तब अपनी बातें, अपने सपने हम बहुत मिस करेंगे।
*दिन, महीने, साल गुजर जाएँगे, शायद कभी कोई संपर्क भी नहीं रहेगा। एक रोज हमारी बहुत पुरानी तस्वीर देखकर हमारे बच्चे हम से पूछेंगे कि, ” तस्वीर में ये दुसरे लोग कौन हैं ?? “
Aur bhi padhen – Soch Ka Bojh
*तब हम मुस्कुराकर अपने अदृश्य आँसुओं के साथ बड़े फख्र से कहेंगे—” ये वो लोग हैं, जिनके साथ मैंने अपने जीवन के बेहतरीन दिन गुजारे हैं। “
*इस मैसेज को अपने उन सभी मित्रों को चाहे तो पोस्ट कीजिए, जिन्हें आप कभी भूल नहीं पाएँगे। जो कभी भी आपकी मुस्कान की वजह बने थे।
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Kuch ankahi batein| कुछ अनकही बातें|

Kuch Ankahi batein Satguru ke liye

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मेरी हर सांस में तू है,,
मेरी हर ख़ुशी में तू है,,
तेरे बिन ज़िन्दगी कुछ नहीं,,
क्योकि मेरी पूरी ज़िन्दगी ही तू !!!
तू ही तू मेरे “गुरुजी” तू ही तू

5 छिद्रों वाले घड़े को कैसे भरेंगे ?
गुरु ने मुस्कान के साथ उत्तर दिया -पानी में ही डूबा रहने दो ;भरा ही रहेगा !
इसी तरह हमारी 5 इन्द्रियाँ परमात्मा में ही डूबी रहेंगी तो संसार क्या बिगाड़ लेगा
तन की जाने, मन की जाने,
जाने चित की चोरी ।
उस प्रभु से क्या छिपावे
जिसके हाथ है सब की डोरी ॥

“जब भी शांति आयेगी, “नाम” से ही आयेगी। ‘नाम’ के बराबर दुनिया मेँ कोई कीमती चीज नहीँ है
जो ‘नाम’ की कमाई नहीं करते, उन्हें क्या पता कि ‘नाम’ कैसी दौलत है
यह “नाम रुपी दौलत” जीते-जी भी साथ है और मरने के बाद भी साथ है
सिवाय ‘नाम’ के, और कोई भी चीज हमारे साथ नहीं जाती”

Aur bhi padhen – कदमों के निशान साखी
❗वो कागज की दौलत ही क्या❓
जो पानी से गल जाये और
आग से जल जाये
दौलत तो दुआओ की होती हैं
न पानी से गलती हैं
न आग से जलती हैं…
आनंद लूट ले बन्दे,
प्रभु की बन्दगी का।
ना जाने कब छूट जाये,
साथ जिन्दगी का।।

प्रीत लगाओ सतगुरु से
जग में क्या रखा है
चरणों से जुड़ जाओ सतगुरु के
जग में क्या रखा है
जग तो है झूठा और मतलबी
मतलब का ही साथ निभाएगा
एक सतगुरु ही है सच्चा जो
तेरी राहों से काँटे चुन चुन के
फूल बिछायेगा।

Mai kuj v nahi satguru tere bina
Tu te saar e meri kahani da
Tera vajood samundran to v vadke hai
Mai te tupka v nahi paani da

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Radha soami g

बूढ़े बाप का दर्द। Boodhe Baap Ka Dard|

पापा पापा मुझे चोट लग गई खून आ रहा है

5 साल के बच्चे के मुँह से सुनना था
कि पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर
गोदी में उठाकर एक किलो मीटर की दूरी पर क्लिनिक तक भाग भाग कर ही पहुँच गए
दुकान कैश काउंटर सब नौकर के भरोसे छोड़ आये
सीधा डाक्टर के केबिन में दाखिल होते हुए डॉक्टर को बोले
देखिये देखिये डॉक्टर
मेरे बेटे को क्या हो गया
डॉक्टर साहब ने देखते हुए कहा
अरे भाई साहब घबराने की कोई बात
है मामूली चोट है…. ड्रेसिंग कर दी है

ठीक हो जायेगी।
डॉक्टर साहब कुछ पेन किलर लिख देते दर्द कम हो जाता । अच्छी से अच्छी दवाईया लिख देते ताकि
जल्दी ठीक हो जाये घाव भर जाये
*डाक्टर* अरे भाई साहब क्यों इतने परेशान हो रहे हो कुछ नहीं हुआ है
3-4दिन में ठीक हो जायेगा
पर डॉक्टर साहब इसको रात को नींद तो आजायेगी ना ।
*डॉक्टर* अरे हाँ भाई हाँ आप चिंता मत करो। बच्चे को लेकर लौटे तो नौकर बोला सेठ जी आपका ब्रांडेड महंगा शर्ट खराब हो गया खून लग गया अब
ये दाग नही निकलेंगे
*भाई साहब* कोई नहीं
ऐसे शर्ट बहुत आएंगे जायेंगे मेरे बेटे का खून बह गया वो चिंता खाये जा रही है कमजोर नहीं हो जाये । तू जा एक काम कर थोड़े सूखे मेवे फ्रूट ले आ इसे खिलाना पड़ेगा और मैं चलता हूँ घर पर
*40 साल बाद*
दुकान शोरूम में तब्दील हो गई है
भाई साहब का बेटा बिज़नस बखूबी संभाल रहा है
भाई साहब रिटायर्ड हो चुके हैं घर पर ही रहते है
तभी घर से बेटे की बीवी का फोन आता है
*बीवी*📞अजी सुनते हो ये आपके पापा पलंग से गिर गए हैं
सर पर से खून आ रहा है
*लड़का*📱 अरे यार ये पापा भी न
इनको बोला ह जमीन पर सो जाया करो पर मानते हीे नही पलंग पर ही सोते है
अरे रामु काका जाओ तो घर पर पापा को डॉक्टर अंकल के पास ले कर आओ मैं मिलता हूँ वहीँ पर।
बूढ़े हो चुके रामु काका चल कर धीरे धीरे घर जाते है
तब तक सेठजी का काफी खून बह चुका था
बहु मुँह चढ़ा कर बोली
ले जाओ जल्दी पूरा महंगा कालीन खराब हो गया है
काका जैसे तैसे जल्दी से रिक्शा में सेठजी को डाल कर
क्लीनिक ले गए
बेटा अब तक नही पंहुचा था
काका ने फोन किया तो बोला
अरे यार वो कार की चाबी नही मिल रही थी अभी मिली है
थोड़े कस्टमर भी है आप बैठो लेकर मैं आता हूँ
जो दूरी 40 साल पहले एक बाप ने
बेटे के सर पर खून देखकर 10 मिनट में बेटे को गोदी में उठा कर भाग कर तय कर ली थी
बेटा 1घन्टा 10 मिनट में कार से भी तय नही कर पाया था
डाक्टर ने जैसे ही भाई साहब को देखा उनको अंदर ले गए इलाज चालू किया
तब तक बेटा भी पहुँच गया
डॉक्टर अंकल बोले
बेटे खून बहुत बह गया है
एडमिट कर देते तो ठीक रहता
*बेटा* अरे कुछ नही डाक्टर साहब
आप ड्रेसिंग कर दो ठीक हो जायेगा
2-4 दिन में ।
डाक्टर अंकल बोले ठीक है कुछ दवाईया लिख देता हूँ थोड़ी महंगी है लेकिन आराम जल्दी हो जायेगा
*लड़का* अरे डॉक्टर अंकल चलेगा 4-5 दिन ज्यादा लगेंगे तो अब इतनी महंगी दवाइयो की क्या जरूरत । चलो मुझे निकलना पड़ेगा शोरूम पर कोई नहीं है ।
ये सुनते ही डॉक्टर अंकल के सब्र का बांध टूट गया
और 40 साल पहले की घटना पूरी सुनाई
बेटे की आँखों आंसू बहने लगे उसे बहुत पस्च्याताप हुआ।
तभी बहू का फोन आया
वो महंगा कालीन खराब हो गया है
क्या करूँ ।
बेटा बोला कालीन ही खराब हुआ है ना …..
नया आजायेगा
तुम पलंग पर नया चद्दर और गद्दा डालो मैँ पापा को ले कर आ रहा हूँ
भाई साहब के आँखों में आँसू थे
और ये ख़ुशी के थे
चोट का दर्द गायब था बेटे
के अपनेपन ने सब भुला दिया।
बस अब तो मौत भी आ जाये तो
मंजूर है ।
दोस्तों ये आज की सच्चाई है
आज हमारे अंदर का इंसान मर चुका है ।
माँ बाप अकेलेपन का जीवन जी
रहे हैं
और बेटा कामयाबी और दौलत
की चकाचौंध में खो कर सब कुछ भूल चुका है ।
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Jab Maharaj Sawan Singh JI Ko Gussa Aya | जब महाराज सावन सिंह जी को गुस्सा आया

Maharaj Sawan Singh ji Ki Sakhi

बाबा सावन सिंह जी एक बार पहाड़ी इलाके में सत्संग करने के लिए गए, वहां पर लोग जात पात को बहुत मानते हैं वहां पर सत्संग घर बन रहा था और रोज सेवा होती थी, रोज लंगर बनता था |
वहां पर बाबा जी ने 2 घंटे सत्संग फ़रमाया और सत्संग करने के बाद बाबा जी ने संगत को बोला कि अगर किसी को कुछ पूछना है तो पूछ सकता है, संगत में आदमी रोते हुए उठा और बोला की बाबा जी मैं छोटी जात का हूँ जिस वजह से मुझ से यहाँ पर कोई अच्छे से बात नहीं करता और ना ही कोई सेवा करने का मौका देता है , मैंने सोचा था के मालिक के घर सब बराबर है लकिन ऐसा नहीं है, मैं आपसे पूछना चाहता हूँ की यहाँ पर ऐसा भेदभाव क्यों किया जाता है |
बाबा जी ने बड़े सख्त शब्दों में कहा कोई नहीं जब तक मालिक बड़ी जात वालों को छोटी जात में जन्म नहीं देता, ये बड़ी जात वाले नहीं सुधरेंगे
बाबा जी के गुस्से वाले यह अल्फ़ाज़ सुन कर सबने बाबा जी के आगे हाथ जोड़ लिए और माफ़ी मांगी |
बाबा जी ने फरमाया कि अगर हम किसी इंसान को नीचा समझते हैं या उसको नफरत करते है तो याद रखो कि हम उस मालिक को ही नफरत कर रहे हैं, हर एक जीव के अन्दर वो मालिक बैठा है | मालिक ने तो इंसान को बनाया था, इंसान ने जात पात को बना दिया, इंसान ने तो उस मालिक को भी बाँट दिया है, अलग अलग धर्म बना दिए, उस दिन बाबा जी ने सबको बड़े ही अच्छे वचन से समझाया – अमलां उत्ते होण नबेड़े, खड़ी रहन गियां जातां, जिसका मतलब है – इंसान अपना सफर पूरा करके जब उस मालिक के पास वापिस जाता है तो वो कुल मालिक उससे यह नहीं पूछता कि तुम कौन सी जाति के हो, वो तो उसके कर्मों का हिसाब किताब खोलता है और उसको उसके कर्मों के हिसाब से ही फल देता है
इसलिए हमें भी यह चाहिए की मालिक की रज़ा में रहे और किसी को भी छोटा न समझें , जो भी यह सोचता है के मैं बड़ी जात का हूँ केवल मुझे ही भक्ति करने का अधिकार है वो सबसे बड़ा मूर्ख है
राधा स्वामी जी
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