Soch Ka Bojh। सोच का बोझ

एक दिन गुरुजी श्री श्री अपने आश्रम मे कुछ भक्तो के साथ बैठे थे ….

श्री श्री ने भक्तो से एक सवाल पुछा कि सबसे ज्यादा बोझ कौन सा जीव उठा कर घुमता है ?
किसी भक्त ने कहा गधा तो किसी भक्त ने बैल तो किसी भक्त ने ऊंट अलग अलग प्राणीयो के नाम बताए !।
लेकिन गुरुजी श्री श्री किसी के भी जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। गुरुजी श्री श्री ने हंसकर कहा – गधे, बैल और ऊट के ऊपर हम एक मंजिल तक बोझ रखकर उतार देते हैं
लेकिन, इंसान अपने मन के ऊपर मरते दम तक विचारों का बोझ लेकर घूमता है!!
किसी ने बुरा किया है उसे न भूलने का बोझ, आने वाले कल का बोझ, अपने किये पापों का बोझ इस तरह कई प्रकार के बोझ लेकर इंसान जीता है।
जिस दिन इस बोझ को इंसान उतार देगा तब सही मायने मे जीवन जीना सीख जाएगा। तब ही परमात्मा के सच्चे दर्शन कर पायेगा।
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क्यों सोचे तू कल की, कल के कौन ठिकाने हैं,!!
ऊपर बैठा वो बाजीगर, जाने क्या मन में ठाने है!!
Aur bhi sakhiyan padhen – कुछ अनकही बातें

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