Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2018

Parivartan – Kuch Achi Batein। परिवर्तन – कुछ अच्छी बातें

परिवर्तन देखिये1. पहले शादियों में घर की औरतें खाना बनाती थीं और नाचने वाली बाहर से आती थीं। अब खाना बनाने वाले बाहर से आते हैं और घर की औरतें नाचती हैं। 2- पहले लोग घर के दरवाजे पर एक आदमी तैनात करते थे ताकि कोई कुत्ता घर में न घुस जाये। आजकल घर के दरवाजे पर कुत्ता तैनात करते हैं ताकि कोई आदमी घर में न घुस जाए। 3- पहले आदमी खाना घर में खाता था और लैट्रीन घर के बाहर करने जाता था। अब खाना बाहर खाता है और लैट्रीन घर में करता है। 4- पहले आदमी साइकिल चलाता था और गरीब समझा जाता था। अब आदमी कार से ज़िम जाता है साइकिल चलाने के लिए। चारों महत्वपुर्ण बदलाव हैं !वाह रे मानव तेरा स्वभाव…. ।। लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है …
पर बेजुबान जीव को मार के खाता है ।। यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो.
जंहा गरीब बाहर और अमीर अंदर ‘भीख’ मांगता है..
विचित्र दुनिया का कठोर सत्य.. बारात मे दुल्हे सबसे पीछे
और दुनिया आगे चलती है,
मय्यत मे जनाजा आगे
और दुनिया पीछे चलती है.. यानि दुनिया खुशी मे आगे
और दुख मे पीछे हो जाती है..! अजब तेरी दुनिया
गज़ब तेरा खेल मोमबत्ती जलाकर मुर्दों को याद करना
और मोमबत्ती बुझाकर जन्मदिन मन…

Dukh Aur Sukh Najariye Ka Khel hai, Ise padhkar apka najariya badal jayega | नजरिये का फर्क।

एक व्यक्ति काफी दिनों से चिंतित चल रहा था जिसके कारण वह काफी चिड़चिड़ा तथा तनाव में रहने लगा था। वह इस बात से परेशान था कि घर के सारे खर्चे उसे ही उठाने पड़ते हैं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी के ऊपर है, किसी ना किसी रिश्तेदार का उसके यहाँ आना जाना लगा ही रहता है, इन्ही बातों को सोच सोच कर वह काफी परेशान रहता था तथा बच्चों को अक्सर डांट देता था तथा अपनी पत्नी से भी ज्यादातर उसका किसी न किसी बात पर झगड़ा चलता रहता था*। एक दिन उसका बेटा उसके पास आया और बोला पिताजी मेरा स्कूल का होमवर्क करा दीजिये, वह व्यक्ति पहले से ही तनाव में था तो उसने बेटे को डांट कर भगा दिया लेकिन जब थोड़ी देर बाद उसका गुस्सा शांत हुआ तो वह बेटे के पास गया तो देखा कि बेटा सोया हुआ है और उसके हाथ में उसके होमवर्क की कॉपी है। उसने कॉपी लेकर देखी और जैसे ही उसने कॉपी नीचे रखनी चाही, उसकी नजर होमवर्क के टाइटल पर पड़ी*। *होमवर्क का टाइटल था*  वे चीजें जो हमें शुरू में अच्छी नहीं लगतीं लेकिन बाद में वे अच्छी ही होती हैं।*इस टाइटल पर बच्चे को एक पैराग्राफ लिखना था जो उसने लिख लिया था। उत्सुकतावश उसने बच्चे का लिखा पढना शुरू क…

Teacher Aur Student ki Khoobsorat Kahani | शिक्षक और विद्यार्थी की मार्मिक कहानी

शिक्षक और विद्यार्थी की सुंदर कहानीएक छोटे से शहर के प्राथमिक स्कूल में कक्षा 5 की शिक्षिका थीं।
उनकी एक आदत थी कि वह कक्षा शुरू करने से पहले हमेशा “आई लव यू ऑल” बोला करतीं। मगर वह जानती थीं कि वह सच नहीं कहती । वह कक्षा के सभी बच्चों से उतना प्यार नहीं करती थीं। कक्षा में एक ऐसा बच्चा था जो उनको एक आंख नहीं भाता। उसका नाम राजू था। 
राजू मैली कुचेली स्थिति में स्कूल आजाया करता है। उसके बाल खराब होते, जूतों के बन्ध खुले, शर्ट के कॉलर पर मेल के निशान। । । 
व्याख्यान के दौरान भी उसका ध्यान कहीं और होता।
मिस के डाँटने पर वह चौंक कर उन्हें देखता तो लग जाता.. मगर उसकी खाली खाली नज़रों से उन्हें साफ पता लगता रहता कि राजू शारीरिक रूप से कक्षा में उपस्थित होने के बावजूद भी मानसिक रूप से गायब हे.
धीरे धीरे मिस को राजू से नफरत सी होने लगी। क्लास में घुसते ही राजू मिस की आलोचना का निशाना बनने लगता। सब बुराई उदाहरण राजू के नाम पर किये जाते. 
बच्चे उस पर खिलखिला कर हंसते.और मिस उसको अपमानित कर के संतोष प्राप्त करतीं। राजू ने हालांकि किसी बात का कभी कोई जवाब नहीं दिया था।
मिस को वह एक बेजान पत्थर की तरह लग…

Soch Ka Bojh। सोच का बोझ

एक दिन गुरुजी श्री श्री अपने आश्रम मे कुछ भक्तो के साथ बैठे थे ….श्री श्री ने भक्तो से एक सवाल पुछा कि सबसे ज्यादा बोझ कौन सा जीव उठा कर घुमता है ? किसी भक्त ने कहा गधा तो किसी भक्त ने बैल तो किसी भक्त ने ऊंट अलग अलग प्राणीयो के नाम बताए !। लेकिन गुरुजी श्री श्री किसी के भी जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। गुरुजी श्री श्री ने हंसकर कहा – गधे, बैल और ऊट के ऊपर हम एक मंजिल तक बोझ रखकर उतार देते हैं लेकिन, इंसान अपने मन के ऊपर मरते दम तक विचारों का बोझ लेकर घूमता है!! किसी ने बुरा किया है उसे न भूलने का बोझ, आने वाले कल का बोझ, अपने किये पापों का बोझ इस तरह कई प्रकार के बोझ लेकर इंसान जीता है। जिस दिन इस बोझ को इंसान उतार देगा तब सही मायने मे जीवन जीना सीख जाएगा। तब ही परमात्मा के सच्चे दर्शन कर पायेगा। —->>Shabad download kren<<—- क्यों सोचे तू कल की, कल के कौन ठिकाने हैं,!!
ऊपर बैठा वो बाजीगर, जाने क्या मन में ठाने है!! Aur bhi sakhiyan padhen – कुछ अनकही बातें

Guru Angad Dev Ji ki sakhi । गुरु अंगद देव जी और रूप सिंह जी की साखी ‘शुकराना’

रूप सिंह बाबा ने अपने गुरु अंगद देव जी की बहुत सेवा की । 20 साल सेवा करते हुए बीत गए। गुरु रूप सिंह जी पर प्रसन्न हुए और कहा मांगो जो माँगना है। रूप सिंह जी बोले गुरुदेव मुझे तो मांगने ही नहीं आता। गुरु के बहुत कहने पर रूप सिंह जी बोले मुझे एक दिन का वक़्त दो घरवाले से पूछ के कल बताता हूं। घर जाकर माँ से पूछा तो माँ बोली जमीन माँग ले। मन नहीं माना। बीवी से पुछा तो बोली इतनी गरीबी है पैसे मांग लो। फिर भी मन नहीं माना। छोटी बिटिया थी उनको उसने बोला पिताजी गुरु ने जब कहा है कि मांगो तो कोई छोटी मोटी चीज़ न मांग लेना। इतनी छोटी बेटी की बात सुन के रूप सिंह जी बोले कल तू ही साथ चल गुरु से तू ही मांग लेना। अगले दिन दोनो गुरु के पास गए। रूप सिंह जी बोले गुरुदेव मेरी बेटी आपसे मांगेगी मेरी जगह। वो नन्ही बेटी बहुत समझदार थी। रूप सिंह जी इतने गरीब थे के घर के सारे लोग दिन में एक वक़्त का खाना ही खाते। इतनी तकलीफ होने के बावजूद भी उस नन्ही बेटी ने गुरु से कहा: गुरुदेव मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप के हम लोगो पे बहुत एहसान है। आपकी बड़ी रहमत है। बस मुझे एक ही बात चाहिए कि, “आज हम दिन में एक बार ही खाना खाते हैं। अगर कभी आगे ए…