जब कबीर जी ने माता लोई का सौदा किया। Radha Soami Sakhi

कबीर साहिब भारत के महान संतो में से एक हुए है। उनके बारे में Parmarthi Sakhiyan में एक साखी दर्ज है।

कबीर साहिब कपड़ा बुनने का काम करते थे। आमदनी बहुत कम थी पर मालिक पर विश्वास पूरा।
एक बार घर मे कुछ मेहमान आ गए। घर मे खाने को अन्न का दाना नहीं था।
माता लोई जी कबीर जी से बोली, घर मे अन्न का दाना नहीं है। मेहमान तो भगवान का साक्षात रूप है उन्हें भूखा कैसे जाने दे।
कबीर जी ने कहा कि चलो बनिये से कुछ उधार ले आते है, कपड़ा बिकते ही चुकता कर देंगे। माता लोई ने हामी भरी और कबीर जी चल दिये।
बनिये की दुकान पर गए तो बनिये ने पहले का हिसाब गिना दिया और आगे उधार देने से मना कर दिया।
कबीर जी ने बनिये को बहुत मिन्नतें की।
बनिये के मन मे पाप आ गया।
वो कबीर जी से बोला " देख कबीर , मैन तुझे पहले ही बहुत उधर दे रखा है। और उधार सिर्फ एक ही शर्त पर दूँगा।
कबीर जी, " वो क्या शर्त है, मुझे सब मंजूर है"।
बनिया, "आपकी पत्नी लोई मुझे एक रात के लिए दे दो, तब मैं उधार दे दूंगा"।
कबीर जी ने तुरंत हामी भरी और वादा करके जरूरत का सब सामान लेकर घर पहुंचे।
माता लोई को सब बताया, ये सब सुनकर माता लोई जी गुस्सा होने की बजाए बोली, "मेहमान आये है, इनके खाना खाकर सो जाने के बाद मैं चली जाउंगी"।
मेहमान को खाना खिलाकर और सोने के लिए चारपाई लगाकर माता लोई जैसे ही बनिये के घर जाने को तैयार हुई तो एक घटना घटी।
अचानक तेज बारिश और बिजली चमकने लगी।
ये सब देख कबीर जी बोले कि तुम अगर इतनी बारिश में अकेले जाओगी तो भीग जाओगी और कीचड़ भी लग जायेगा।
ऐसा करो मैं तुम्हें पीठ पर उठा लेता हूँ, और ऊपर से कपड़ा ओढ़ लेना।
माता जी प्रभु के कंधे पर बैठ गयी और अंधेरी गलियों में चल पड़ी। गली में पानी पानी हुआ पड़ा था और कीचड़ ही कीचड़ दिखाई दे रहा था।

बनिये के घर पहुंचते ही कबीर जी ने माता को चौखट पे उतारा और बोले,"मैं यहीं इंतेज़ार करता हूं तुम जाओ"।
सत बचन बोल कर माता अंदर चली गयी।
बनिया कब से उनका इंतेज़ार कर रहा था। वो माता लोई को देखकर बहुत खुश हुआ।
अचानक उसकी नजर माता जी के कपड़ो पर पड़ी।
वो बोला," बाहर इतनी बारिश हो रही है ,कीचड़ ही कीचड़ है और तुम्हारे ऊपर एक छींटा भी नहीं, यह कैसे ?
माता जी बोली, "वो मेरे पति मुझे अपनी पीठ पर बिठा कर लेके आये है, और बाहर इंतेज़ार कर रहे है"।
जब बनिये ने ये सुना तो उसकी आँखों से अश्रुधारा बह निकली, जिसने उसके अंदर की मैल को धो डाला।
वो तुरंत कबीर जी के पास गया है उनको चरणों मे गिर कर रोने लगा और बोला," प्रभु मैं कितना मूर्ख निकला जो इतनी गिरी हुई हरकत की, और आप इतने महान की आप अपनी पत्नी को इतनी बारिश में उठाकर लेके आये मुझ जैसे नीच के पास , आखिर क्यों ??"।
कबीर जी बोले," मुझे पता था कि मेरा प्रभु कभी मुझे झुकने नही देगा, मुझे उसपे पूरा विश्वास था"।
ये सुनकर वो और जोर से रोने लगा।
उसके बाद उसने सारे बुरे काम छोड़ दिये और भक्ति मार्ग पर अग्रसर हो चला।

To dekha ap sab ne. Kaise prabhu apne pyaron ki kaise laj rakhta hai..
Agar apko ye saakhi pasand ayi ho to is sachi saakhi ko share jrur kren.
Aur sakhiyan padhne ke liye www.RadhaSoamiSakhi.org pe visit krte rhen
Book- Parmarthi Sakhiyan

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  1. http://www.freestoreart.info/2018/06/radha-soami-sakhi/

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