60 pyare Shabad jo babaji aksar satsang me bolte hai| Radha Soami Sakhi

"These quotations are commenly used by BABA JI in thier satsangs:                      

▪1. Naamu upje naamu binse.


▪ 2. Chinta miti chahat gyi manoa beparwah, jisko kachoo na chahiye wahi shanshah.


▪ 3. Satsangat kesi jaaniye, jithe eko naam vakhanie.


▪ 4. Amla ute hon nibere kharian rehangiya jaata. 


▪5. Sajjan seyi naal mein, chaldiya nal chalan, jithe lekha mangie titthe khade disan.


▪ 6. Man mania manjoor hai, satguru sada hazur hai.


▪ 7. Oh shah sade to vakh nahi, par vekhan wali aakh nahi tahio jaan jodaia payi sehndi ae. 


▪8. Mere Pritmma......... hau jeeva naam dheyae, bin naame jiwan na thhie mere satgur naam dir rraye.


▪ 9. Eko naam hukam hai nanak satguru diya bujhye jiyo.


▪ 10. Atam me ram Ram me atam. 


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▪11. Na sukh wich gresath de, na sukh chhad giya, sukh hai vichar de saanta sharan piya 


▪12. Jagjeewan saacha eko daata. 


▪13. Harmender eh shareer hai, gian ratan pargat hoye. 


▪14. Is deh vich naam nidhaan hai paayie gur ke hirde aapar.


▪ 15. You are the temple of living god.


 ▪16. Saach kaho sun leyo sabhi, jin prem kiyo tin hi prabh paayeo. 


▪17. Bheekha bhookha ko nahi sabki gathri lal, gireh khol na jaante taate bhaye kangal. 


▪18. Assa parbat jediya mot tanava heth. 


▪19. chaar gawaye hend ke chaar gawaya sam, jad lekha rab mangesia tu aayeo kehde kam. 


▪20. Naam raheo sadhu raheo, raheo guru gobind, kaho nanak is jagat mein kin japeo gurmant.


▪ 21. Paltu ek hi ek hai, dusar nahi koi. 


▪22. Vastu kahi, dhunde kahi. 


▪23. Moot paliti kapad hoye, de sabun layie oh dhoye, bharie mat paapa ke sang oh dhupe naave ke rang.


 ▪24. Sab kuch apna ik ram parayea. 


▪25. Koor raja, koor parja, koor sab sansaar, koor koore neho laga, visria kartar, kis nal kije dosti, sab jag chalanhaar. 


▪26. Utpat parlo shabde hove, shabde hi fir upat hove. 


▪27. Paltu uchi jaat ka, mat kare koi hankaar, sahib ke darbar mein kewal bhagt pyar.


 ▪28. Attachment create detachment, detachment can never create attachment. 


▪29. Haume dheerag rog hai daru bhi is maahi, kirpa kare je apni ta gur ka shabad kamaye. 


▪30. Self realization before god realization. 


▪31. Je raaj karaye ta teri upma, je bheekh mangaye ta kya ghat jaayi. 


▪32. Sabna jeeya da eko daata , jiyo jant jeev sab tis de, sabna da soyi, manda kisnu aakhiye, je ko duja hoye. 


▪33. God made his man his own image.


▪ 34. Basis of religion is love, not fear. 


▪35. Ab kaloo aayeo re ik naam bowo bowo.


▪ 36. Maan tu jot saroop hai apna mool pachhaan. 


▪37. Bawan aakhar lok tare , sab kuch in maahi, eh aakhar khind jayege oh aakhar in me naahi.


▪ 38. Ho tis ki aas kar rahe man mere, jo sabka soami raha samyae.


 ▪39. Hum vaasi us desh ke jaha jaat varan kul naahi, shabad milava hoye rahe deh milava naahi.


 ▪40. Dadde dosh na deyo kise, dosh karma apneya, jo mein kiya so mein paayea dosh na dije awarjana. 


▪41. Padiye jete baras baras, padiye jete maas, padiye jete aarza padiye jete swaas, nanak lekhe ik gal horo haume chakhan chakh. 


▪42. God is love, love is god. 


▪43. The Begining was the word, the word was with god & and the word was god. 


▪44. Ek pita ekas ke hum baalak.


▪45. Ved puran pad pad thhake, sajde kardiya ghis gaye maathe na rab teerath na maake, jin paaye tin dil vich yaar. 


▪46. Gur ke charan basae mere maathe.


▪ 47. Ucha bol na bolie kartaro dariye. 


▪48. Eh ras aawa, oh raas jaawa. 


▪49. Bin chhakhe, sadh na jaape. 


▪50. Shabad guru, surat, dhun, chela. 


▪51. Bhai prapat manukh dehooria, gobind milan ki eh teri baria, awar kaaj tere kise na kaam, sadh sangat bhaj kewal naam.


▪ 52. Paayeo ji....... maine naam.... ratan.... dhan... payeo. 


▪53. Man jeete jag jeet hai..


▪ 54. Karoota beej beeje nahi jame, sab laha mool gawaida.


▪ 55. Tapo raj rajo narak. 


▪56. Tan thir man thhir.


▪ 57. Kaljug me kirtan pardhana gurmukh japeye laye dhayana.


 ▪58. Har ka sewak so har jeha, Bhed na jano manas deha 


▪59. Lakh choorasi joon subhai manas ko prabh di vadeyai, is paudi te jo nar chuke so aaye jaye dukh paaye da 


▪60. Nanak dukhiya sab sansar, so sukhia jo naam aadhar

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बुल्ले शाह और गुलाल। जब शिष्य और गुरु एक साथ जन्मे। Radha soami sakhi

**********बुल्ले शाह और गुलाल*********

गुलाल शिष्य थे बुल्ला शाह के। यह तो कोई बात खास नहीं: बुल्ला शाह के बहुत शिष्य थे। और हजारों सदगुरू हुए है और उनके हजारों-लाखों शिष्य हुए है। इसमें कुछ अभूतपूर्व नहीं। अभूतपूर्व ऐसा है कि गुलाल एक छोटे-मोटे जमिंदार थे। और उनका एक चरवाहा था। उसकी आंखों में खुमार था। उसके उठने-बैठने में एक मस्ती थीं। कहीं रखता था पैर, कहीं पड़ते थे पैर। और सदा मगन रहता था। कुछ था नहीं उसके पास मगन होने को—चरवाहा था, बस दो जून रोटी मिल जाती थी। उतना ही काफी था। सुबह से निकल जाता खेत में काम करन, जो भी काम हो,रात थका मांदा लौटता; लेकिन कभी किसी ने उसे अपने आनंद को खोते नहीं देखा। एक आनंद की आभा उसे घेरे रहती थी। उसके बाबत खबरें आती थी—गुलाल के पास, मालिक के पास—कि यह चरवाहा कुछ ज्यादा काम करता नहीं; क्योंकि उसे खेत में नाचते देखा जाता था। मस्त डोलते मगन आसमान में उड़ते पक्षियों की तरह चहकते देखा था। काम ये क्या खाक करेगा। तुम भेजते हो गाएं चराने गाए एक तरफ चरती रहती है, यह झाड़ पर बैठकर बांसुरी बजाता है। हां, बांसुरी गजब की बजाता है। यह सच है, मगर बांसुरी बजाने से और गाय चराने से क्या लेना-देना है। तुम तो भेजते हो कि खेत पर यह काम करे और हमने इसे खेत में काम करते तो कभी नहीं देखा, झाड़ के नीचे आंखे बंद किये जरूर देखा है। यह भी सच है कि जब वह झाड़ के नीचे आंखे बंद करके बैठता है तो इसके पास से गुजर जाने में भी सुख की लहर छू जाती है। मगर उससे खेत पर काम करने का क्या संबंध है।

बहुत शिकायतें आने लगीं। और गुलाल मालिक थे। मालिक का दंभ और अंहकार। तो कभी उन्होंने बुलाकी राम को गौर से तो देखा नहीं। फुर्सत भी न थी; और भी नौकर चाकर होगें, और कोई नौकर-चाकरों को कोई गोर से देखता है भला। 
खबरें आती थीं, मगर गुलाल ने कभी ध्यान दिया ही नहीं था। उस दिन खबर आयी सुबह-ही-सुबह कि तुमने भेजा है नौकर को कि खेत में बुआई शुरू करे, समय बीता जाता है, बुआई का, मगर बैल हल को लिए एक तरफ खड़े है। और बुलाकी राम झाड़ के नीचे आंखे बंद किए डोल रहा है।

एक सीमा होती है। मालिक सुनते-सुनते थक गया था। कहा: मैं आज जाता हूं ओर देखता हूं। जाकर देखा तो बात सच थीं। बैल हल को लिए खड़े थे एक किनारे—कोई हांकने वाला ही नहीं था—और बुलाकी राम वृक्ष के नीचे आँख बंद किए डोल रहे थे। मालिक को क्रोध आ गया। देखा—यह हरामखोर, काहिल, आलसी….। लोग ठीक कहते है। उसके पीछे पहुंचे और जाकर जोर से एक लात उसे मार दी। बुलाकी राम लात खाकर गिर पडा। आंखे खोली। प्रेम और आनंद के अश्रु बह रहे थे। बोला आपने मालिक से: मेरे मालिक, किन शब्दों में धन्यवाद दूँ? कैसे आभार करूं, क्योंकि जब आपने लात मारी तब में ध्यान कर रहा था। जरा से बाधा रह गई थी। छूट ही नहीं रही थी। जब भी ध्यान करता वो अड़चन बन सामने खड़ी हो जाती थी। आपने लात मारी वह बाधा मिट गई। मेरी बाधा थी जब भी मस्त होता ध्यान में मगन होता मस्त होता, तो गरीब आदमी हूं, साधु-संतों को भोजन करवाने के लिए निमंत्रण करना चाहता था। लेकिन में तो गरीब आदमी हूं, सो कहां से भोजन करवाऊंगा, तो बस ध्यान में जब मस्त होता भंडारा करता हूं, मन ही मन मैं सारे साधु-संतों को बुला लाता हूं कि आओ सब आ जाओ दुर देश से आ जाओ। और पंक्तियों पर पंक्तियां साधुओं की बैठी थी और क्या-क्या भोजन बनाए थे। मालिक परोस रहा था, मस्त हो रहा था। इतने साधु-संत आये है, एक से एक महिमा वाले है। और तभी आपने मार दी लात। बस दही परोसने को रह गया था; आपकी लात लगी, हाथ से हाँड़ी छूट गई, दही बिखर गई,हांडी फुट गई। मगर गजब कर दिया मेरे मालिक, मैंने कभी सोचा भी न था कि आपको ऐसा कला आती है। हाँड़ी क्या फूटी, मानसी-भंडारा विलुप्त हो गया, साधु-संत नदारद हो गए—कल्पना ही थी सब, कल्पना का ही जाल था—और अचानक मैं उस जाल से जग गया, बस साक्षी मात्र रह गया।
आँख से आंसू बह रहे है। आनंद के और प्रेम के शरीर रोमांचित है हर्ष लाश उन्माद से, एक प्रकाश झर रहा है। बुलाकी राम की यह दशा पहली बार गुलाल ने देखी। बुलाकी राम ही नहीं जागा साक्षी में, अपनी आंधी में गुलाल को भी बहा ले गया। आँख से जैसे एक पर्दा उठ गया। पहली बार देखा कि यह कोई चरवाहा नहीं;मैं कहां-कहां, किन-किन दरवाज़ों पर सद् गुरूओं को खोजता रहा,सदगुरू मेरे घर में मौजूद था। मेरी गायों को चरा रहा था। मेरे खेतों को सम्हाल रहा था। गिर पड़े पैरो में; बुलाकी राम, बुलाकी राम न रहे—बुल्ला शाह हो गए। पहली दफा गुलाल ने उन्हें संबोधित किया: बुल्ला साहिब। मेरे मालिक, मेरे प्रभु, साहब का अर्थ: प्रभु। कहां थे नौकर, कहां हो गए शाह, शाहों के शाह।
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कहते है बहुत फकीर हुए है, लेकिन बुल्ला शाह का कोई मुकाबला नहीं। और यह घटना बड़ी अनूठी है। अनूठी इसलिए है कि युगपत घटी। सद्गुरू और शिष्य का जन्म एक साथ हुआ। सद्गुरू का जन्म भी उसी वक्त हुआ। उसी सुबह; क्योंकि वह जो आखिरी अड़चन थी, वह मिटी। इसलिए भी अद्भुत है। वह जो आखरी अड़चन है वह शिष्य द्वारा मिटी। हालांकि गुलाल ने कुछ जानकर नहीं मिटायी थी। आकस्मिात था, मगर निमित तो बने शिष्य ने सदगुरू की आखरी अड़चन मिटाई। इधर गुरु का जन्म हुआ, इधर गुरु का आविर्भाव हुआ, उधर शिष्य के जीवन में क्रांति हो गयी। बुल्ला शाह को कंधे पर लेकर लौटे गुलाल। वह जो लात मारी थी। जीवन भर पश्चाताप किया, जीवन भर पैर दबाते रहे।
बुल्ला शाह कहते मेरे पैर दुखते नहीं है, क्यों दबाते हो? वे कहते: वह जो लात मारी थी…..। तीस-चालीस साल बुल्ला शाह जिंदा रहे, गुलाल पैर दबाते रहे। एक क्षण को भी साथ नहीं छोड़ते थे। आखिरी क्षण भी बुल्ला शाह जब मर रहे थे तब भी गुलाल पैर दबा रहे थे। बुल्ला शाह ने कहा: अब तो बंद कर रे, पागल , पर गुलाल ने कहां कि कैसे बंद करूं? वह जो लात मारी थी।
गुरु को लात मारी, बुल्ला शाह लाख समझाते रहे कि तेरी लात से ही तो मैं जागा, मैं अनुगृहीत हूं। तू नाहक पश्चाताप मर कर। लेकिन गुलाल कहते: वह आपकी तरफ होगी बात। मेरी तरफ तो पश्चाताप जारी रहेगा।
लेकिन एक साथ ऐसी घटना पहले कभी नहीं घटी थी कि सद्गुरू हुआ और शिष्य जन्मा—एक साथ, युगपत, एक क्षण में यह घटना घटी। यह आग दोनों तरफ एक साथ लगी और दोनों को जोड़ गयी।
Ye thi sakhi bulle shah ji aur gulal ki
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Ye bhi padhen - 20 याद रखने योग्य बातें

20 याद रखने योग्य बातें। 20 things to remember । Radha soami sakhi

*1.🌟 प्रतिदिन 10 से 30 मिनट टहलने की आदत बनायें. चाहे समय ना हो तो घर मे ही टहले , टहलते समय चेहरे पर मुस्कराहट रखें.


🌟 *2.* प्रतिदिन कम से कम 10 मिनट चुप रहकर बैठें.

           

🌟 *3.* पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा पुस्तकें पढ़ें.

         

🌟 *4.* 70 साल की उम्र से अधिक आयु के बुजुर्गों और 6 साल से कम आयु के बच्चों के साथ भी कुछ समय व्यतीत करें.

     

🌟 *5.* प्रतिदिन खूब पानी पियें.

           

🌟 *6.* प्रतिदिन कम से कम तीन बार  ये सोचे की मैने आज कुछ गलत तो नही किया.

         

🌟 *7.* गपशप पर अपनी कीमती ऊर्जा बर्बाद न करें.

         

🌟 *8.* अतीत के मुद्दों को भूल जायें, अतीत की गलतियों को अपने जीवनसाथी को याद न दिलायें.

       

🌟 *9.* एहसास कीजिये कि जीवन एक स्कूल है और आप यहां सीखने के लिये आये हैं. जो समस्याएं आप यहाँ देखते हैं, वे पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं.

           

🌟 *10.* एक राजा की तरह नाश्ता, एक राजकुमार की तरह दोपहर का भोजन और एक भिखारी की तरह रात का खाना खायें.

         

🌟 *11.* दूसरों से नफरत करने में अपना समय व ऊर्जा बर्बाद न करें. नफरत के लिए ये जीवन बहुत छोटा है.

           

🌟 *12.* आपको हर बहस में जीतने की जरूरत नहीं है, असहमति पर भी अपनी सहमति दें.

         

🌟 *13.* अपने जीवन की तुलना दूसरों से न करें.

           


🌟 *14.* गलती के लिये गलती करने वाले को माफ करना सीखें.

       

🌟 *15.* ये सोचना आपका काम नहीं कि दूसरे लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं.

       

🌟 *16.* समय ! सब घाव भर देता है.

             

🌟 *17.* ईर्ष्या करना समय की बर्बादी है. जरूरत का सब कुछ आपके पास है.

           

🌟 *18.* प्रतिदिन दूसरों का कुछ भला करें.

             

🌟 *19.* जब आप सुबह जगें तो अपने माता-पिता को धन्यवाद दें, क्योंकि माता-पिता की कुशल परवरिश के कारण आप इस दुनियां में हैं.

           

🌟 *20.* हर उस व्यक्ति को ये संदेश शेयर करें जिसकी आप परवाह करते हैं..l💞🌷🌹

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