रूहानियत या कुछ और


एक बार एक संत घर से रूहानियत की तलाश में निकला। वह अपना सब कुछ त्याग कर बरसों घोर तप करता रहा।
एक दिन वो अपनी तपस्या में मगन था। ऊपर चिड़ियाँ जोर जोर से चहक रही थी। उस संत का ध्यान भटकाने लगा।
चिड़ियों का चहकना बंद नहीं हुआ।
संत गुस्से से उठकर बोला, "जाओ मर जाओ तुम सब"
और ये क्या उसके इतना बोलते ही सभी चिड़ियाँ जमीन पर गिर गयी।
वो बहुत खुश हुआ कि आखिर मेरी तपस्या सफल हुई।
वो घर की तरफ चल पड़ा।
चलते चलते वो एक गांव में पहुंचा जहां एक औरत कुएं में से पानी निकाल कर अपने पैरों पर डाल रही थी।
वो बोला "मुझे पानी पिलाओ"
औरत ने अनसुना करके पानी डालना जारी रखा।
वो फिर बोला" तुम मुझे जानती नहीं मैं कोन हु"
औरत बोली, " मैं जानती हूं तुम जो चिड़ियाँ मार कर आये हो जंगल में"

वो सकपका गया कि इसे कैसे पता चली जंगल वाली बात
वो हैरान होकर पूछा कि तुम्हें कैसे पता चला।
वो बोली ," तुम जो सिद्धि बरसों की तपस्या से हासिल करके आये हो वो मैंने रातों रात हासिल की है।

वो और चकराया की जो सिद्धि मैंने बरसों का हठ कर्म करके हासिल की है वो इसने रातों रात कैसे हासिल करली।

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वो बोला " हे माते, आप मुझे बताएं कि ये आपने रातों रात कैसे हासिल की"?

वो बोली, " तो सुनो, मेरी नई नई शादी हुई थी। मुझे रात को सपना आया कि मेरे पति ने पानी मांगा है। मैं आधी रात कुएं से पानी भरके सुबह तक उनके तकिये के पास खड़ी रही। उस मालिक ने मेरी कर्मठता देखकर मुझे इस सिद्धि से नवाजा।"

वो बोला," तो तुम पैरों पे पानी क्यों डाल रही थी ?

औरत बोली," मेरी बहन के घर मे आग लगी है, उसे ही बुझा रही हु।

उसने अपनी सिद्धि से देखा कि सचमें उसकी बहन के घर आग लगी थी जो अब बुझ चुकी थी।

वो बोली," क्या तुम्हारा लक्ष्य सिर्फ इस सिद्धि को पाना था ?

वो बोला," नहीं"

औरत बोली," तो किसी पूर्ण सतगुरु से नाम का भेद लो और कमाई करो"

हमें असली नाम ले भेद किसी पूरण संत सतगुरु से ही मिल सकता है। और मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।
राधा स्वामी जी
रूहानियत या कुछ और रूहानियत या कुछ और Reviewed by vishal kumar on June 08, 2017 Rating: 5

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