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Showing posts from June, 2017

पूरा गुरु। साखी कबीर जी की। Radha Soami Sakhi

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यही हैं कर्मों की नेकी

एक राजा ने कबीर साहिब जी से प्रार्थना की किः 
"आप दया करके मुझे साँसारिक बन्धनों से छुड़ा दो।"

तो कबीर जी ने कहाः 
"आप तो हर रोज पंडित जी से कथा करवाते हो, सुनते भी हो...?"

"हाँ जी महाराज जी ! कथा तो पंडित जी रोज़ सुनाते हैं, 
विधि विधान भी बतलाते हैं,
लेकिन अभी तक मुझे भगवान के दर्शन नहीं हुए ,आप ही कृपा करें।"

कबीर साहिब जी बोले
"अच्छा मैं कल कथा के वक्त आ जाऊँगा।"

अगले दिन कबीर जी वहाँ पहुँच गये, जहाँ राजा पंडित जी से कथा सुन रहा था। 
राजा उठकर श्रद्धा से खड़ा हो गया, तो कबीर जी  बोले--

"राजन ! अगर आपको प्रभु का दर्शन करना है तो आपको मेरी हर आज्ञा का पालन करना पड़ेगा।"

"जी महाराज मैं आपका हर हुक्म  मानने को तैयार हूँ जी !

राजन अपने वजीर को हुक्म दो कि वो मेरी हर आज्ञा का पालन करे।"

राजा ने वजीर को हुक्म दिया कि कबीर साहिब जी जैसा भी कहें, वैसा ही करना।
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कबीर जी ने वज़ीर को कहा कि एक खम्भे के साथ राजा को बाँध दो  और दूसरे खम्भे के साथ पंडित जी को बाँध दो। राजा ने तुरंत वजीर को इशारा किया कि आज्ञा का …

आदर्श शिष्य। Adarsh Shishya। Radha soami sakhi

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विदेशी सत्संगियो की एक मीटिंग में किसी ने सवाल पूछा।,”क्या बड़े महाराज जी आपके पितामह थे ?” “हां” महाराज जी ने जवाब दिया,और फिर बड़ा जोर देकर बोले, “लेकिन वे मेरे सतगुरु भी थे ,और यही ज्यादा महत्वपूर्ण है । ” यह उत्तर बड़े महाराज जी के साथ उनके सम्बन्धो के बारे में बहुत कुछ प्रकट करता है । जब भी वे बड़े महाराज जी की बात करते है,उनकी आँखे भर आती है और गला रुंध जाता है। ऐसा अक्सर बातचीत के दौरान ,और खासकर जब वे सत्संग में बड़े महाराज जी का कोई जिक्र् करते है ,होता है । ऐसा गहरा है उनका प्रेम अपने प्यारे के प्रति ।

चरित्र। Radha soami sakhi

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मानव जीवन की स्थायी निधि है चरित्र
सद्भावना के लिए आवश्यक है चरित्र। सद्विचारों और सत्कर्मों की एकरूपता ही चरित्र है। जो अपनी इच्छाओं को नियंत्रित रखते हैं और उन्हें सत्कर्मों का रूप देते हैं, उन्हीं को चरित्रवान कहा जा सकता है। संयत इच्छाशक्ति से प्रेरित सदाचार का नाम ही चरित्र है।चरित्र मानव जीवन की स्थायी निधि है। जीवन में सफलता का आधार मनुष्य का चरित्र ही है। चरित्र मानव जीवन की स्थायी निधि है। सेवा, दया, परोपकार, उदारता, त्याग, शिष्टाचार और सद्व्यवहार आदि चरित्र के बाह्य अंग हैं, तो सद्भाव, उत्कृष्ट चिंतन, नियमित-व्यवस्थित जीवन, शांत-गंभीर मनोदशा चरित्र के परोक्ष अंग हैं। किसी व्यक्ति के विचार इच्छाएं, आकांक्षाएं और आचरण जैसा होता है, उन्हीं के अनुरूप चरित्र का निर्माण होता है।
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उत्तम चरित्र जीवन को सही दिशा में प्रेरित करता है। चरित्र निर्माण में साहित्य का बहुत महत्व है। विचारों को दृढ़ता और शक्ति प्रदान करने वाला साहित्य आत्म निर्माण में बहुत योगदान करता है। इससे आंतरिक विशेषताएं जाग्रत होती हैं। यही जीवन की सही दिशा का ज्ञान है।मनुष्य जब अपने से अधिक बुद…

एक ही परमात्मा। Radha Soami Sakhi

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Ek hi Parmatma। Radha Soami Sakhiएक मुसलमान फकीर हुआ, सरमद। सरमद के जीवन में एक बड़ी मीठी घटना है। सरमद पर, जैसा कि सदा होता है, उस जमाने के मौलवियों ने एक मुकदमा चलवाया। पंडित सदा से ही संत के विरोध में रहा है। सरमद पर एक मुकदमा चलवाया, सम्राट के दरवाजे पर सरमद को बुलवाया गया। मुसलमानों में एक सूत्र है। वह सूत्र यह है कि एक ही अल्लाह है और कोई अल्लाह नहीं उसके सिवाय, और एक ही पैगंबर है उसका, मुहम्मद। लेकिन सूफी फकीर इसमें से आधा हिस्सा छोड़ देते हैं। वे पहला हिस्सा तो कहते हैं कि एक परमात्मा के सिवाय और कोई परमात्मा नहीं है। दूसरा हिस्सा कि उसका एक ही पैगंबर है मुहम्मद, यह वे छोड़ देते हैं। क्योंकि वे कहते हैं कि उसके बहुत पैगंबर हैं। इसलिए सूफियों के खिलाफ सदा से ही मुस्लिम थियोलाजी जो है वह सदा से सूफियों के खिलाफ रही है। सरमद तो और भी खतरनाक था। वह सूफियों के इस पूरे सूत्र को भी पूरा नहीं कहता था। इसमें से भी आधा उसने छोड़ दिया था। सूत्र है कि एक ही परमात्मा के सिवाय कोई परमात्मा नहीं। वह सिर्फ इतना ही कहता था, कोई परमात्मा नहीं— आखिरी हिस्से को।
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अब यह तो…

सांस जरूरी या परमात्मा। Radha Soami Sakhi

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एक समय की बात है। किसी महात्मा के पास एक लड़का आया और बोला कि मुझे भी परमात्मा से मिला दो मैं भी उसे देखना चाहता हूं।

महात्मा बोले," ये तेरे बस की बात नहीं है, तुझे अभी सिर्फ चाव है प्रेम नही।"

लड़का, " मैं कुछ नहीं जानता आप मुझे भी दिखाओ परमात्मा, मैं भी तो देखूं क्या है वो"

महात्मा, " बेटा ये कोई खेल नहीं है, इसमे खुद को गवाना पड़ता है"

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लड़का," कोई बात नही बाबा मैं तैयार हूं।"

महात्मा ," अच्छा, चलो पर तुम्हे खुद को भी त्यागना पड़ेगा याद रखना।"

लड़का," हां बाबा"

महात्मा उसको एक सरोवर में ले गए और बोले कि चलो स्नान करलो,
वो कुंड में उतर गया"

महात्मा ने उसकी गर्दन पकड़ कर उसे कुंड में डुबो दिया, वो छटपटाने लगा, बाहर निकाला तो बोला," मुझे सांस नही आ रही,
महात्मा बोले," ऐसे ही मिलेगा परमात्मा" और उसे फिर डुबो दिया।
दोबारा बाहर निकाला तो बोला," बस करो मेरी सांस नही आ रही"

महात्मा बोले, " अब बता सांस चाहिए या परमात्मा।
वो उखड़ी हुई सांस लेते हुए बोला ," सांस चाहिए।

महात्मा बोले," …

सेवा का मूल्य । Radha Swami sakhi

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एक सत्संगी महिला ने महाराज जी से एक बार पूछा की उसकी अपनी कोई आमदनी नहीं है और उसे सेवा देने के लिए हमेशा अपने पति से रुपया मांगना पड़ता है; क्या ऐसी सेवा का उसको लाभ मिलेगा ? क्या ऐसी सेवा का कोई मूल्य है ? Also read - जो हाथ से चला गया उसका दुख क्या करना
महाराज जी ने उत्तर दिया, “हाँ,अगर आप दोनों सेवा देने में खुश है महाराज जी ने एक लंगड़े सत्संगी का उदारहण देकर इस बात को समझाया,”वह लंगड़ा सत्संगी भंडारों पर हिमाचल प्रदेश के पहाड़ो से आता था और गरीब था । वह 75 मील बैसाखी के सहारे पैदल चलकर आता था,ताकि सेवा में देने के लिए रूपया बचा सके। उसे श्री बुलाकानी एक दिन घन की सेवा के समय मेरे पास लाये । उसने एक रूपया सेवा में दिया । उसकी गरीबी देखते हुए मेने सेवादारो से उसकी सेवा लेने को मना किया,इस पर वह रोने लगा,और मुझे उसकी सेवा मंजूर करनी पडी ।” महाराज जी ने पूछा ,” क्या इस सेवा की कीमत आंकी जा सकती है? क्या यह धनवानों के दिए हुए हज़ारो -लाखो रुपयो से ज्यादा कीमती नहीं है ? सेवा का मूल्य इससे नहीं आँका जा सकता की आपने क्या दिया है ; उसकी कीमत तो उस प्रेम की भावना में है जिसके साथ वह सेवा दी गयी …

जो हाथ से चला गया उसका दुख क्या करना।

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जो हाथ से चला गया उसका दुख क्या करना! 
एक आदमी तड़के नदी की ओर जाल लेकर जा रहा था।  नदी के पास पहुंचने पर उसे आभास हुआ कि सूर्य अभी पूरी तरह बाहर नहीं निकला हैं।  घने अंधेरे में वह मस्ती से टहलने लगा।
Must readचार पत्नीयाँ
तभी उसका पैर झोले से टकराया। उत्सुकतापूर्वक उसने झोले में हाथ डाला तो पाया कि उसमें बहुत बड़े-बड़े चमकीले पत्थर भरे पड़े हैं। समय बिताने के लिए उसने झोले में से एक-एक पत्थर निकाला और नदी में फेकता गया। धीरे-धीरे उसने झोले के कई पत्थर नदी में फेक दिए , जब अंतिम पत्थर उसके हाथ में था तभी सूर्य की रोशनी धरती पर फैल गई। सूर्य के प्रकाश में उसने देखा कि उसके हाथ में बचा अंतिम पत्थर बहुत तेज चमक रहा था। उस पत्थर की चमक देखे वह दंग रह गया। क्योकि वह पत्थर नही बल्कि अनमोल हीरा था। उसे एहसास हुआ कि अब तक वह करोड़ों के पत्थर नदी में फेक चुका था। वह फूट-फूटकर रोने लगा
Beautiful sakhi - अल्लाह की मर्जी
उसके हाथ में बचे अंतिम पत्थर को देख कर वह अंधेरे को कोस रहा था। वह नदी के किनारे शोकमग्न बैठा था कि इतने में वहां से एक महात्मा गुजरे। उसका दुख जानकर वे बोले-बेटे रोओ मत, तुम अ…

सेवा का सौभाग्य। Radha Soami Sakhi

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एक बार की घटना है बाबा जी कहीं पर कुछ काम करवा रहे थे संगत सेवा कर रही थी ।  डेरे के कुछ बड़ बड़े जत्थेदार और औहदेदार भी वहां मौजूद थे सेवा समाप्त होने के बाद सब सेवादार वहां से चले गए  । एक को छोड़ कर बाबा जी भी जब वहां से चलने लगे तो उन प्रबंधकों से बोले इस सेवादार को भी गाड़ी में बिठा लो।  वहां पर मौजूद लोग एक दुसरे का मुंह देखने लगे। आखिर बाबा जी इस सेवादार को साथ क्यों ले जा रहे हैं…!! अब गुरु का आदेश था तो उस सेवादार को साथ ले लिया । लेकिन अब गाड़ी में
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बैठने की जगह नहीं थी सेवादार ने कहा कोई बात नहीं दास आपके चरणों में नीचे ही बैठ जाएगा और वो नीचे ही बैठ गया और गाड़ी चल पड़ी  तभी किसी ने उस से व्यंग्य से पूछा क्यों भाई साहब आप केवल सेवा ही करते हो या कोई काम धंधा भी है….!!  यह सुन कर वह सेवादार मुस्कराया और उस ने हाथ जोड़ कर बड़ी ही विनम्रता से कहा….!! ” दास तो सुप्रीम कोर्ट का एक छोटा सा जज है । सेवा का सौभाग्य तो कभी कभी हजूर सच्चे पातशाह की कृपा से बड़ी मुश्किल से ही मिलता है।” सभी एक दम अपनी सीटों से खड़े हो गये और उस सेवादार को सीट देने लगे। बाबा जी भी अपने …

जानिए कैसे करना है भजन सिमरन। Radha soami sakhi

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हम सबको भजन सिमरन करने का हुक्म है।
पर सही तरीका क्या है ? 
बाबाजी नामदान के वक्त सही तरीका समझाते है। आप भी पढ़ें और जाने

1. सिमरन हमेशा छुप कर करना चाहिए। खुद को ढक लेना चाहिए, ताकि हमें कोई देख न सके और हम बिना किसी बाधा के सिमरन कर सके।

2. सिमरन सुबह 3 बजे उठकर, नहा धोकर करना चाहिए, नहाना इसलिए जरूरी है ताकि सुस्ती न आ सके, और कोई खास कारण नही है।

3. रात को भोजन संयम से करना चाहिए ताकि ज्यादा नींद न आये और हम रात को भी सिमरन कर सकें।

4. खाना हमेशा शाकाहारी और हल्का फुल्का होना चाहिए, ताकि शरीर बीमारियों से बचा रहे।

5. किसी भी प्रकार के नशे का सेवन वर्जित है।

6. प्रेम करें, मोह नहीं।

7. अपने अन्दरूनी रहस्यों को कभी दूसरों को न बताएं, इससे आपकी ही दौलत कम होगी।

8. क्रोध को कोसों दूर रखें। क्रोध और सिमरन ये उलट है।
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9. सतगुरु का चिंतन हमेशा करते रहे। एक पल के लिए भी नाम को न भूलें।

10. संयम से काम लें। परइस्त्री( परायी इस्त्री) पर कभी भी नजर न रखे। ये आपकी वर्षों की कमाई दौलत को मिट्टी कर सकता है। और आपको पीछे धकेल सकता है।
www.RadhaSoamiSakhi.org
11. कभी शिकायत न करें। ज…

सत्संग में जाने के फ़ायदे। Radha soami sakhi

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कीर्तन और सत्संग मे जाने से फ़ायदा ही फ़ायदा होता है।कभी नुकसान नही होता।एक अँधा फूलों के बाग में चला जाता है,
 अगर वह फूलों की खूबसूरती को नही देख सकता तो फूलों की सुगंध तो जरुर ले ही जायगा। 
जैसे एक पत्थर पानी में डूबा दो चाहे पिघलता नहीं पर कम से कम सूरज की तपिश से तो बचा रहता है।
इसी प्रकार अगर हम सत्संग में जा कर नाम की कमाई करते हैं तो सोने पे सुहागा है नही भी करते तो भी कम से कम बुरी संगत से तो बचे रहते हैं।

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सत्संग वह आईना है।जहाँ पर सत्संगी अपने अवगुणों को देख कर सुधारने की कोशिश करता है।
और उसकी कोशिश ही उसे एक दिन गुरमुख बना देती है।हमारा खुद का सुधरना भी किसी सेवा से कम नहीं है।ये भी एक बन्दगी है।
                 - महाराज चरण सिंह जी


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गुरु पर विश्वास। Radha Soami Sakhi

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करतार पुर में गुरु नानक साहेब जी के दर्शन करने के लिए एक दिन बहुत संगत आ गयी। उस टाईम वहाँ लंगर प्रसाद चल रहा था। आई हुई बहुत सी संगत की वजह से वहाँ लंगर प्रसाद कम पड़ने लगा। ये बात जब सेवक जी ने आ कर गुरु नानक महाराज जी को बताया तो, सतगुरु बाबा गुरु नानक जी ने उस सेवक को हुक्म किया की, कोई सिख सामने कीकर के वृक्ष पर चढ़ कर उसे हिलाओ उससे मिठाइयां बरसेंगी वो मिठाइयां आई संगत में बाँट दो। ये सुनकर गुरु पुत्र बाबा श्री चन्द जी और बाबा लक्षमी दास जी बोले, बाबा जी कीकर का तो अपना भी कोई फल नही होता बस कांटे ही काँटे होते है उससे कहाँ मिठाइयां बरसेंगी।
कुछ कच्ची श्रद्धा वाले भगत बोले – सारा संसार घूम घूम कर बज़ुर्गी में गुरु नानक साहेब जी सठिया गए है, भला कीकर से कभी मिठाइयां बरसी है?


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ये सब बातें सुन रहे भाई लहणे को हुक्म हुआ, भाई लहणे तू चढ़, बिना इक पल की देर लगाए भाई लहणा कीकर पर चढ़ गए और भाई लहणा जोर जोर से कीकर को हिलाने लगे, दुनिया ने ये सब देखा, कीकर से मिठाइयां बरसी और वे सारी मिठाइयां सारी संगत खाई और जब सारी संगत त्रिपत हो गयी तो हुक्म हुआ।
लहणे अब तू नीचे आजा…

मृत्यु की तैयारी। Radha soami sakhi

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गुरु नानक जी के पास सतसंग में एक छोटा लड़का प्रतिदिन आकर बैठ जाता था। एक दिन नानक जी ने उससे पूछाः- “बेटा, कार्तिक के महीने में सुबह इतनी जल्दी आ जाता है, क्यों?” वह छोटा लड़का बोलाः- “महाराज, क्या पता कब मौत आकर ले जाये?” नानक जीः- “इतनी छोटी-सी उम्र का लड़का, अभी तुझे मौत थोड़े मारेगी? अभी तो तू जवान होगा, बूढ़ा होगा, फिर मौत आयेगी। लड़का बोलाः- “महाराज, मेरी माँ चूल्हा जला रही थी, बड़ी-बड़ी लकड़ियों को आग ने नहीं पकड़ा तो फिर उन्होंने मुझसे छोटी-छोटी लकड़ियाँ मँगवायी। माँ ने छोटी-छोटी लकड़ियाँ डालीं तो उन्हें आग ने जल्दी पकड़ लिया। इसी तरह हो सकता है मुझे भी छोटी उम्र में ही मृत्यु पकड़ ले, इसीलिए मैं अभी से सतसंग में आ जाता हूँ।” इसलिए जल्दी से परमात्मा से प्रेम करके जीवन सफल बना लो इन स्वांसो से बडा दगाबाज कोइ नही है, कहीं बाद मे पछताना ना पडे 

कुर्बानी के बिना मालिक नहीं मिलता। Radha soami sakhi

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संतों की एक सभा चल रही थी 

किसी ने एक दिन एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सकें

संतों की उस सभा के बाहर एक व्यक्ति खड़ा था. उसने गंगाजल से भरे घड़े को देखा तो उसे तरह-तरह के विचार आने लगे

वह सोचने लगा- अहा ! यह घड़ा कितना भाग्यशाली है !

एक तो इसमें किसी तालाब पोखर का नहीं बल्कि गंगाजल भरा गया और दूसरे यह अब सन्तों के काम आयेगा

संतों का स्पर्श मिलेगा, उनकी सेवा का अवसर मिलेगा. ऐसी किस्मत किसी किसी की ही होती है

       Also read - अल्लाह की मर्जी

घड़े ने उसके मन के भाव पढ़ लिए और घड़ा बोल पड़ा- बंधु मैं तो मिट्टी के रूप में शून्य पड़ा था

किसी काम का नहीं था. कभी नहीं लगता था कि भगवान् ने हमारे साथ न्याय किया है

फिर एक दिन एक कुम्हार आया. उसने फावड़ा मार-मारकर हमको खोदा और गधे पर लादकर अपने घर ले गया

वहां ले जाकर हमको उसने रौंदा. फिर पानी डालकर गूंथा. चाकपर चढ़ाकर तेजी से घुमाया, फिर गला काटा. फिर थापी मार-मारकर बराबर किया

बात यहीं नहीं रूकी. उसके बाद आंवे के आग में झोंक दिया जलने को

इतने कष्ट सहकर बाहर निकला तो गधे पर लादकर उसने मुझे बाजार में भेज …

मृत्यु की तैयारी। Maut ki tyari - Radha soami sakhi

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गुरु नानक जी के पास सतसंग में एक छोटा लड़का प्रतिदिन आकर बैठ जाता था। एक दिन नानक जी ने उससे पूछाः- “बेटा, कार्तिक के महीने में सुबह इतनी जल्दी आ जाता है, क्यों?” वह छोटा लड़का बोलाः- “महाराज, क्या पता कब मौत आकर ले जाये?” नानक जीः- “इतनी छोटी-सी उम्र का लड़का, अभी तुझे मौत थोड़े मारेगी? अभी तो तू जवान होगा, बूढ़ा होगा, फिर मौत आयेगी। लड़का बोलाः- “महाराज, मेरी माँ चूल्हा जला रही थी, बड़ी-बड़ी लकड़ियों को आग ने नहीं पकड़ा तो फिर उन्होंने मुझसे छोटी-छोटी लकड़ियाँ मँगवायी। माँ ने छोटी-छोटी लकड़ियाँ डालीं तो उन्हें आग ने जल्दी पकड़ लिया। इसी तरह हो सकता है मुझे भी छोटी उम्र में ही मृत्यु पकड़ ले, इसीलिए मैं अभी से सतसंग में आ जाता हूँ।” इसलिए जल्दी से परमात्मा से प्रेम करके जीवन सफल बना लो इन स्वांसो से बडा दगाबाज कोइ नही है, कहीं बाद मे पछताना ना पडे 

Jo hai uska Shukar kro - Radha soami sakhi

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एक भिखारी भूख – प्यास से त्रस्त होकर
आत्महत्या की योजना बना रहा था ,
तभी वहां से
एक नेत्रहीन महात्मा गुजरे
| भिखारी ने उन्हें अपने मन
की व्यथा सुनाई
और कहा , ” मैं अपनी गरीबी से तंग
आकर
आत्महत्या करना चाहता हूँ |”
उसकी बात सुन महात्मा हँसे और
बोले , “ठीक
है, आत्महत्या करो लेकिन पहले
अपनी एक आंख
मुझे दे दो | मैं तुम्हे एक हज़ार
अशरफिया दूंगा | ” भिखारी चोंका |
उसने कहा ,
“आप कैसी बात करते हैं | मैं आंख
कैसे दे
सकता हूँ |”
महात्मा बोले, “आंख न सही , एक हाथ
ही दे दो ,
मैं तुम्हे एक हज़ार
अशरफिया दूंगा | ”
भिखारी असमंजस में पड़ गया |
महात्मा मुस्कराते हुए बोले, संसार
में सबसे
बड़ा धन निरोगी काया है | तुम्हारे
हाथ-पाव ठीक
है, शारीर स्वस्थ है, तुमसे
बड़ा धनी और कौन हो सकता है |
तुमसे गरीब
तो में हूँ कि मेरी आँखें नहीं हैं
मगर में
तो कभी आत्महत्या के बारे में
नहीं सोचता | भिखारी ने उनसे
छमा मांगी और
संकल्प किया कि वह कोई काम करके
जीवन-
यापन करेगा |

अल्लाह की मर्जी । Allah Ki marji Sakhi

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एक बादशाह था, वह जब नमाज़ के लिए मस्जिद जाता, तो 2 फ़क़ीर उसके दाएं और बाएं बैठा करते! दाईं तरफ़ वाला कहता: “या अल्लाह! तूने बादशाह को बहुत कुछ दिया है, मुझे भी दे दे!” बाईं तरफ़ वाला कहता: “ऐ बादशाह!अल्लाह ने तुझे बहुत कुछ दिया है, मुझे भी कुछ दे दे!”   दाईं तरफ़ वाला फ़क़ीर बाईं तरफ़ वाले से कहता: “अल्लाह से माँग! बेशक वह सबसे बैहतर सुनने वाला है!” बाईं तरफ़ वाला जवाब देता: “चुप कर बेवक़ूफ़ ”एक बार बादशाह ने अपने वज़ीर को बुलाया और कहा कि मस्जिद में दाईं तरफ जो फ़क़ीर बैठता है वह हमेशा अल्लाह से मांगता है तो बेशक अल्लाह उसकी ज़रूर सुनेगा, लेकिन जो बाईं तरफ बैठता है वह हमेशा मुझसे फ़रियाद करता रहता है, तो तुम ऐसा करो कि एक बड़े से बर्तन में खीर भर के उसमें अशर्फियाँ डाल दो और वह उसको दे आओ!
वज़ीर ने ऐसा ही किया…
अब वह फ़क़ीर मज़े से खीर खाते- खाते दूसरे फ़क़ीर को चिड़ाता हुआ बोला: “हुह… बड़ा आया  ‘अल्लाह देगा…’ वाला,  यह देख बादशाह से माँगा,  मिल गया ना? ” खाने के बाद जब इसका पेट भर गया तो इसने खीर से भरा बर्तन उस दूसरे फ़क़ीर को दे दिया और कहा: “ले पकड़… तू भी खाले,  बेवक़ूफ़ अगले दिन जब बादशाह नमाज़ के लिए मस्जिद आया तो …

कर्मों का फल । Karmon Ka Fal

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एक बार धृतराष्ट्र  ने श्री कृष्ण जी से पूछा, " हे भगवन, मुझे अपने 100 जन्मों तक का ज्ञात है, मैन ऐसा कोई कर्म नही किया कि मैं अंधा होउ। फिर मैं अंधा क्यों हु। कृपया मेरी समस्या का निवारण करें।
श्री कृष्ण बोले, "हे राजन, तुम्हे अपने 100 जन्मो का ज्ञात है, पर तुमने अपने 101 वें जन्म में कुछ ऐसा कर्म किया था कि तुम अंधे पैदा हुए। धृतराष्ट्र बोले, " मुझे बताये भगवन मैने ऐसा क्या किया कि मैं अंधा पैदा हुआ। श्री कृष्ण ने उनपे कृपा करके उन्हें उनके 101 वें जन्म में ले गए। वहां धृतराष्ट्र देखते है कि वो जब एक बच्चे थे तब उन्होंने मजे के लिए एक कीड़े की आंख में तिनका मारकर उसे घायल करदिया। वो कीड़ा तड़प रहा था और वो मजे से हंस रहे थे। ये सब देखकर धृतराष्ट्र बोले, " मैं समझ गया भगवन, किये हुए कर्म भुगतने पड़ेंगे। हमारे कर्म ऐसी चीज होती है जो हमारा कभी पीछा नही छोड़ते। भजन सिमरन करने से कर्म कटते नही। बल्कि उनका बोझ हल्का हो जाता है। मालिक पे विश्वास होने से वो सारे कर्म हल्के लगने लगते है। "इसलिए कहते है भगवान से मत डरो तो चलेगा। पर अपने कर्मों से जरूर डरना। क्योंकि किये हुए कर्मों…

रूहानियत या कुछ और

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एक बार एक संत घर से रूहानियत की तलाश में निकला। वह अपना सब कुछ त्याग कर बरसों घोर तप करता रहा।
एक दिन वो अपनी तपस्या में मगन था। ऊपर चिड़ियाँ जोर जोर से चहक रही थी। उस संत का ध्यान भटकाने लगा।
चिड़ियों का चहकना बंद नहीं हुआ।
संत गुस्से से उठकर बोला, "जाओ मर जाओ तुम सब"
और ये क्या उसके इतना बोलते ही सभी चिड़ियाँ जमीन पर गिर गयी।
वो बहुत खुश हुआ कि आखिर मेरी तपस्या सफल हुई।
वो घर की तरफ चल पड़ा।
चलते चलते वो एक गांव में पहुंचा जहां एक औरत कुएं में से पानी निकाल कर अपने पैरों पर डाल रही थी।
वो बोला "मुझे पानी पिलाओ"
औरत ने अनसुना करके पानी डालना जारी रखा।
वो फिर बोला" तुम मुझे जानती नहीं मैं कोन हु"
औरत बोली, " मैं जानती हूं तुम जो चिड़ियाँ मार कर आये हो जंगल में"

वो सकपका गया कि इसे कैसे पता चली जंगल वाली बात
वो हैरान होकर पूछा कि तुम्हें कैसे पता चला।
वो बोली ," तुम जो सिद्धि बरसों की तपस्या से हासिल करके आये हो वो मैंने रातों रात हासिल की है।

वो और चकराया की जो सिद्धि मैंने बरसों का हठ कर्म करके हासिल की है वो इसने रातों रात कैसे हासिल करली।

Al…

मेहरबान है साहिब मेरा

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कुछ समय पहले की बात है, सेवा के जत्थे (Group) लंगर की सेवा के लिए ब्यास पहुँच चुके थे, बाबा जी उनको दर्शन देने के लिए गए, थोड़ी सी दूरी पर एक अकेला भाई खड़ा दोनों हाथ जोड़ के खड़ा था, जैसे वो लंगर की सेवा करने के लिए तरस रहा हो, बाबा जी ने उसे देखा और फिर एक जत्थे (Group) से पूछा कि क्या वो भाई उनके साथ आया है? उन्होंने मना कर दिया । फिर बाबा जी ने दूसरे जत्थे से पूछा, उन्होंने ने भी मना कर दिया, इसी तरह से सभी जत्थों ने मना कर दिया, तब बाबा जी ने फ़रमाया कि अगर हम इसे अपने साथ ले लें तो किसी की कोई ऐतराज़ तो नहीं है, सबने कहा कि नहीं बाबा जी ने सेवादारों से कहा कि इस भले आदमी को मेरी कोठी में ले आओ, सेवादार उसे बाबा जी कोठी में ले गए, वो आदमी रो रहा था और सोच रहा था की कहीं उस से कोई गल्ती तो नहीं हो गयी? जब बाबाजी उससे मिले तो बाबा जी ने पूछा कि क्या लंगर की सेवा की चाहत है? तो वो बोला कि हाँ जी है, बाबा जी ने पूछा कि क्या करते हो? तो वो बोलता है कि मैं अकेला हूँ, कोई नहीं है इसलिए मैं तो हमेशा लंगर की सेवा कर सकता हूँ, बाबा जी ने उसे अपने गले से लगाया और सेवादारों को बुला के कहा कि आज…

डेरा ब्यास question answer 27-05-2017

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डेरा ब्यास question answer 27-05-2017

1. लड़का- बाबाजी क्या मुक्ति के लिए नाम दान लेना जरूरी है
बाबाजी - नहीं बेटा। ऐसा बिल्कुल भी नही है। अगर दिल मे प्रेम और बिरह है तो मालिक जरूर बख्शीश करेंगे।
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2. लड़का - बाबाजी मैं engineering और medical में से किसी एक को चुनना चाहता हूं और मैं दोनों में अच्छा हु। क्या करूँ
बाबाजी - अकड़ बकड बंबे बो। असी नबे पूरे सो। (संगत में जोरदार ठहाका) 
लड़का - बाबाजी हेल्प कीजिये न
बाबाजी- तू ऐसा कर आधा इंजीनियर बनजा और आधा डॉक्टर। डॉक्टर बनके टांग काट देना और इंजीनियर बनके नई लगा देना। (संगत जोर से हँसने लगी)
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3. लड़की ( रोते हुए) - बाबाजी मेरे से गलती हो गयी है। क्या आप मुझे माफ़ करदोगे।
बाबाजी - बेटा अगर गलती हुई है तो उसका फल तो भुगतना ही पड़ेगा।
लड़की( और रोते हुए) - बाबाजी फिर मैं क्या करूँ की आप माफ करदोगे
बाबाजी - बेटा अपनी गलतियों से सीखो। अगर दुबारा वही गलती करोगे तो दुगना फल भुगतना पड़ेगा।
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4. लड़की - बाबाजी मेरा रिजल्ट आने वाला है। किरपा करना
बाबाजी - मुस्कुराते हुए, बेटा मिलेगा तो वही जो लिखा होगा
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