चरित्र। Radha soami sakhi

by June 25, 2017
मानव जीवन की स्थायी निधि है चरित्र सद्भावना के लिए आवश्यक है चरित्र। सद्विचारों और सत्कर्मों की एकरूपता ही चरित्र है। जो अपनी इच्छ...Read More

सेवा का मूल्य । Radha Swami sakhi

by June 21, 2017
एक सत्संगी महिला ने महाराज जी से एक बार पूछा की उसकी अपनी कोई आमदनी नहीं है और उसे सेवा देने के लिए हमेशा अपने पति से रुपया मांगना पड़ता है...Read More

सेवा का सौभाग्य। Radha Soami Sakhi

by June 20, 2017
एक बार की घटना है बाबा जी कहीं पर कुछ काम करवा रहे थे संगत सेवा कर रही थी ।  डेरे के कुछ बड़ बड़े जत्थेदार और औहदेदार भी वहां मौजूद थे स...Read More

गुरु पर विश्वास। Radha Soami Sakhi

by June 18, 2017
करतार पुर में गुरु नानक साहेब जी के दर्शन करने के लिए एक दिन बहुत संगत आ गयी। उस टाईम वहाँ लंगर प्रसाद चल रहा था। आई हुई बहुत सी स...Read More

मृत्यु की तैयारी। Radha soami sakhi

by June 17, 2017
गुरु नानक जी  के पास सतसंग में एक छोटा लड़का प्रतिदिन आकर बैठ जाता था। एक दिन नानक जी ने उससे पूछाः- “बेटा, कार्तिक के महीने में सुबह...Read More

Jo hai uska Shukar kro - Radha soami sakhi

by June 16, 2017
एक भिखारी भूख – प्यास से त्रस्त होकर आत्महत्या की योजना बना रहा था , तभी वहां से एक नेत्रहीन महात्मा गुजरे | भिखारी ने उन्हें अपने मन...Read More

कर्मों का फल । Karmon Ka Fal

by June 10, 2017
एक बार धृतराष्ट्र  ने श्री कृष्ण जी से पूछा, " हे भगवन, मुझे अपने 100 जन्मों तक का ज्ञात है, मैन ऐसा कोई कर्म नही किया कि मैं अं...Read More

रूहानियत या कुछ और

by June 08, 2017
एक बार एक संत घर से रूहानियत की तलाश में निकला। वह अपना सब कुछ त्याग कर बरसों घोर तप करता रहा। एक दिन वो अपनी तपस्या में मगन था। ऊपर चि...Read More

मेहरबान है साहिब मेरा

by June 07, 2017
कुछ समय पहले की बात है, सेवा के जत्थे (Group) लंगर की सेवा के लिए ब्यास पहुँच चुके थे, बाबा जी उनको दर्शन देने के लिए गए, थोड़ी सी दूरी...Read More
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