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प्यार की ताकत

 
ये साखी वर्त्तमान सतगुरु के बारे में है। एक बार बाबा जी का प्रेमी था जो बहुत दूर रहता था और वो बहुत गरीब था।
वो जूते बनाने का काम करता था और हक़ हलाल की कमाई करता था। वो हर बार डेरे जाने की सोचता पर हर बार पैसों की कमी की वजह से जा नही पाता।
                   
एक बार बाबा जी का हिमाचल में चक्कर लगा। उन्होंने सत्संग में दर्शन देने के बाद ड्राइवर को गाड़ी एक पहाड़ी की तरफ ले जाने को बोला। ड्राइवर ने भी बिना कोई सवाल जवाब किये बिना गाड़ी घुमा ली। गाड़ी एक पगडण्डी पर जाकर रुकी। आगे का रास्ता चलकर जाने वाला था। बाबा जी लगभग 4 से 5 किलोमीटर चलकर उस आदमी की झोपड़ी के पास पहुंचे। 
वहां पास में ही उसकी दुकान थी। उसकी दुकान इतनी छोटी थी की बाहर खड़े आदमी का चेहरा नही दिखता था।
बाबाजी ने अपना जूता आगे करके साफ़ करने को बोला। उसने जूते को पोलिश करदिया। बाबाजी ने पूछा की कितने पैसे हुए। वो बोला की साहब 5 रुपए।
बाबाजी ने उसे 10 का नोट दिया।
उसने कहा कि साहब खुले नही है। 5 खुले दीजिये।
बाबाजी ने कहा कि तू बाकि के रखले कोई बात नही।
वो आदमी बोला की नही मैं 5 नही रख सकता, मेरे गुरु ने मेरे को हक़ हलाल की कमाई करने का हुकम दिया है।
बाबाजी बोले अच्छा कोन है तेरा गुरु।
वो बोला वही जो ब्यास में रहते है उनकी लंबी सफ़ेद दाड़ी है।
बाबाजी बोले अच्छा चलो बाहर आओ।
उसने सोचा मेने शायद सेठ के महंगे जूतों को ख़राब करदिया है और वो दुकान में और दुबककर बैठ गया और बाहर आने से मना करने लगा।
बाबाजी ने सिक्योरिटी को हुकम दिया की इसे बहार लेके आओ।
उन सबने उसे बहार निकाला। जब उस आदमी ने बाबाजी को साक्षात् अपने पास खड़े देखा तो वो फूट फूट कर रोने लगा। उसे यह एहसास हो गया कि वो जितना प्यार बाबाजी से करता है बाबाजी उससे दुगना प्यार उससे करते है।
प्यारी साद संगत जी अगर आप बाबाजी से प्यार करते है तो ये महिमा तो छोटी सी है। वो तो हर पल हर घडी हमारे साथ है।
राधा स्वामी जी


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किसी ने एक दिन एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सकें

संतों की उस सभा के बाहर एक व्यक्ति खड़ा था. उसने गंगाजल से भरे घड़े को देखा तो उसे तरह-तरह के विचार आने लगे

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एक तो इसमें किसी तालाब पोखर का नहीं बल्कि गंगाजल भरा गया और दूसरे यह अब सन्तों के काम आयेगा

संतों का स्पर्श मिलेगा, उनकी सेवा का अवसर मिलेगा. ऐसी किस्मत किसी किसी की ही होती है

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Latest Satsang dera beas 24-June-2018| सत्संग डेरा ब्यास

Satsang dera beas 24-June-2018

सत्संग डेरा ब्यास

जो जो ब्यास नहीं जा सका वो सत्संग यहां पढ़ो जी। और अपने प्रिय जनो के साथ शेयर भी करो जी।

Published by- RadhaSoamiSakhi.org

बाबाजी ने स्टेज पर आते ही अपने स्वभाव अनुसार संगत को प्रणाम किया और संगत पर वो रूह को झझकोर देने वाली दृष्टि डाली।

प्रत्येक रूह उसके दर्शन को पाकर हर्षोल्लास से गदगद हो रही थी, जो कि संगत के चेहरे से साफ साफ देखा जा सकता था।



बाबाजी ने इस बार हुज़ूर तुलसी साहिब की ग़ज़ल " दिल का हुजरा साफ कर, जाना के आने के लिए" ली और बहुत ही खूबसूरत तरीके से व्याख्या की।



-सत्संग के कुछ अंश

शब्द- दिल का हुजरा साफ कर, जाना के आने के लिए। ध्यान गैरों का उठा उसके बिठाने के लिए।



बाबाजी- शब्द धुन या शब्द प्रकाश सबके अंदर निरंतर बज रहा है, हमारे और शब्द के बीच बारीक से पर्दा है वो है मन का। मन दुनियावी लज्जतों में इतना खो चुका है कि उसे उस धुन का ख्याल ही नही है।

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जानिए कैसे करना है भजन सिमरन। Radha soami sakhi

हम सबको भजन सिमरन करने का हुक्म है।
पर सही तरीका क्या है ? 
बाबाजी नामदान के वक्त सही तरीका समझाते है। आप भी पढ़ें और जाने

1. सिमरन हमेशा छुप कर करना चाहिए। खुद को ढक लेना चाहिए, ताकि हमें कोई देख न सके और हम बिना किसी बाधा के सिमरन कर सके।

2. सिमरन सुबह 3 बजे उठकर, नहा धोकर करना चाहिए, नहाना इसलिए जरूरी है ताकि सुस्ती न आ सके, और कोई खास कारण नही है।

3. रात को भोजन संयम से करना चाहिए ताकि ज्यादा नींद न आये और हम रात को भी सिमरन कर सकें।

4. खाना हमेशा शाकाहारी और हल्का फुल्का होना चाहिए, ताकि शरीर बीमारियों से बचा रहे।

5. किसी भी प्रकार के नशे का सेवन वर्जित है।

6. प्रेम करें, मोह नहीं।

7. अपने अन्दरूनी रहस्यों को कभी दूसरों को न बताएं, इससे आपकी ही दौलत कम होगी।

8. क्रोध को कोसों दूर रखें। क्रोध और सिमरन ये उलट है।
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9. सतगुरु का चिंतन हमेशा करते रहे। एक पल के लिए भी नाम को न भूलें।

10. संयम से काम लें। परइस्त्री( परायी इस्त्री) पर कभी भी नजर न रखे। ये आपकी वर्षों की कमाई दौलत को मिट्टी कर सकता है। और आपको पीछे धकेल सकता है।
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