"चश्मा" संभाल का ( राधा स्वामी जी)

एक बार बाबा चरण सिंह जी सत्संग कर रहे थे | बाबा जी का सत्संग समाप्त हुआ और उस सत्संग के बाद बाबा जी ने विदेश जाना था सत्संग करने के लिए | बाबा जी सेवादारो को और खुली सेवा वालों को दर्शन दे कर विदेश के लिए रवाना हो गए |
बयास में सेवा जोरों से चल रही थी बाबा जी जाने के लिए जहाज मैं बैठ गए | जहाज मैं बाबा जी के साथ और भी बहुत से लोग बैठे थे  | एक लड़की ने बाबा जी को पहचान लिया और उनके पास आ कर कहने लगी के आप वही हो न जो ब्यास मैं बैठते हो  | बाबा जी ने मुस्कुरा कर बोला के हाँ मैं वही हूँ  | बाबा जी ने काला चश्मा लगाया हुआ था  | उस लड़की ने बाबा जी से पूछा के बाबा जी आप ब्यास छोड़ कर सारी सांगत छोड़ कर इतनी दूर जा रहे हो जो संगत पीछे ब्यास मैं सेवा कर रही है उनका ख्याल कौन रखेगा  |

तो बाबाजी ने बड़े पयार से कहा की बेटा ब्यास में ऐसी बहुत सी संगत है जो एक दूसरे का ख्याल रखती है   | उस लड़की ने कहा की बाबा जी आपका चश्मा बहुत ही अच्छा है क्या मैं इसे देख सकती हूँ  | बाबा जी ने अपना चश्मा उसे उतार कर दे दिया  | जब उसने बाबा जी का चश्मा पहना तो वो हैरान हो कर बाबा जी के चरणो मैं गिर गई
और माफ़ी मांगने लगी और कहने लगी के बाबा जी मेने आपके जैसा परमात्मा नहीं देखा | क्योंकि उसको बाबा जी से किये सवाल का उतर उस चश्मे मैं मिल गया था  | उस चश्मे मैं सारा ब्यास दिख रहा था  | उसे यह एहसास हो गया था की बाबा जी जहाँ भी चले जाएँ उनकी नजर हमेशा ब्यास पर ही होती है  | वो सभी पर अपनी दया दरिष्टि बनाये रखते हैं  |
बाबा जी जहाँ भी जाये पर उनकी नजर सदा हमारे ऊपर ही रहती है | हमारे बाबा जी पूर्ण रूप से पहुंचे हुए गुरु हैं  | बाबा जी को बाहर से तो प्रेम करो पर अन्दर से इतना विरह पैदा करो के बाबा जी खुद आपको भवसागर पार करवाने के लिए आएं  |
Fb page Radha soami ji
"चश्मा" संभाल का ( राधा स्वामी जी) "चश्मा" संभाल का ( राधा स्वामी जी) Reviewed by vishal kumar on July 14, 2016 Rating: 5

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