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3/7/16 का सतसंग ( राधा सवामी जी )

3/7/16... बाबा जी नें चेयर पे बैठ कर बिना पाठी जी के 50 मिनट का सतसंग किया, बाबा जी
8.15 पे स्टेज पे आ गये और 8.20 पे सतसंग शुरु कर दिया और 9.10 पे समाप्त कर राधास्वामी
बुलाई...  बाबा जी नें कहा...  अज कल असीं लोग
ग्रन्थ पोथियां पढना ही परमार्थ बना लिया है... संतों, महापुरुषों के किस्से कहानियों को सुन लिया
बस हो गयी परमात्मा की पूजा... जे हुन कोई बच्चा स्कूल दाखला लै लवे पर जो उत्थे पढाया जांदा
है उह सिखन दी कोशिश ही न करे बस मास्टर दी शक्ल देख के आ जावे...  जां स्कूल दी परिक्रमा
कर के आ जावे.. जां स्कुल किवें बनिया, किस ने बनाया एह हिस्ट्री ही पढी, सुनी जावे ते कि
उह पास हो जाऊगा...!! ओ भाई इस सब दा फायदा की है जे असीं जो सुनिया जो
पढिया जे उस ते अमल ही ना कीता सानू हासिल की होऊगा जो वी हासिल होना नाम दी कमाई चों हासिल होना है... भजन सिमरन चों हासिल होना है... असली कम असीं करना नहीं चाहंदे बस फालतू दे कमाल विच अपना कीमती वक्त खराब करन लगे होए हां मते किसे दे मन विच एह भुलेखा होवे कि जी
असीं नामदान लै लिया है जे भजन सिमरन नां वी कीता तां वी अगला जन्म मनुख जन्म ही
मिलूगा अपने मन विचों एह वहम बिलकुल कढ देवो कोई गारंटी नहीं है... जे साडा आचार विहार
जानवरां वर्गा है तां जानवरां दा जामा ही मिलना है....नशेआं बारे किहा... कि बच्चे बिगड़ रहे हन ओ
नशे करन लग पये हन... कसूर किस दा है.. मां- बाप दा है... उन्हा पास अपने बच्चेआं लयी
टाईम ही नही है... माया दी दौड़ लगी होई है... ओ की करदे हन अपने बच्चेआं दे हथ वच पैसे दे के
अपना पिछा छुड़ान दी कोशिश करदे हन...नतीजा उस पैसे दा गल्त इस्तेमाल... कोई उन्हा नूं सही
रस्ता दिखान वाला नहीं है... ओ सिख्या कित्थों लैन... जां टी वी जां मोबाइल जां वीडियो
गेमां ते जां फिर उस सोसाइटी तों जो पहलां ही विगड़ी होई है... ते उन्हा ने उदां दे ही बन जाना है... पहलां जोआईंट फैमलीयां हुंदियां सी... नाना नानी, दादा दादी कोई न कोई बजुर्ग घर विच हुंदा सी जो
बच्चेआं दा ख्याल रखदा सी... बच्चे वी उन्हा नाल खुश रहंदे सी... पर हुन असीं अपने बजुर्गां नू बोझ
समझना शुरू कर दिता है... असीं उन्हा नूं अपने नाल रखना नहीं चाहुंदे... भाई जे एह बोझ लगदा
है तां जो बोझ तुहाडे तन मन ते उदों पैना है जदों बच्चेआं नें बिगड़ जाना है तुहाडे हत्थों निकल
जाना है... तुसीं सहार नहीं सकोंगे... ते नाले भाई जो बोना है उही कटन नूं वी तैयार रहना है... जे
अज्ज तुहाडे मां बाप तुहानु बोझ लगदे हन तां भाई कल नूं तुहाडी औलाद नू तुसी वी बोझ ही लगना
है कियोंकि.. जो उन्हा देखना... उही सिखना..ते उही करना...सो भुगतन लई तैयार रहो...संसार दा तां
एहो कानून है... जैसी करनी वैसी भरनी...जित्थों तक डसिप्लन दी गल्ल है या साफ सफाई दी गल्ल है... तां डेरे विच्च बहुत है... पर एहो संगत जदों डेरे तों बाहर चली जांदी है अपने पिंडा, शहरां विच तां फिर की हो जांदा है... असीं कहने हां जि एह तां सरकार दा कम है... ओ भाई सरकार वी तां तुहाडी ही चुनी होई है.. उत्थे वी तुहाडे वरगे ही लोग नें उन्हा दी सोच वी आप वर्गी ही है... भाई उन्हा नें कह दित्ता की अपने आले दुआले साफ सफाई रखो... हुन करना सानू आप ही पैना है...कोशिश तां करो... अज्ज इक कोशिश करेगा कल देखा देखी दूसरे वी करनगे... जे असीं सिर्फ अपने अपने घर दा आला दुआला ही साफ रखिये तां देख लवो सब साफ हो जाएगा... जरूरत है शुरू करन दी... कर्मां दा कानून बहुत सखत है... महाराज जी किहा करदे सन कि हवा नाल जे पडोसी दे खेत चों इक दाना वी उड के साडे खेत विच आ जावे तां उसदा वी हिसाब देना पवेगा.. कसूर साडा नहीं है हवा दा है पर हिसाब सानू ही देना पैना है... साडा हत्थ सदा देन दी मुद्रा विच होना चाहिदा है ना कि लैन दी मुद्रा विच... तां जो अंत वेले जद हिसाब देन दा टाईम आए तां साडी लैन दारी जायदा निकलनी चाहिदी है ना के देन दारी..... अजकल इक नवां इ रिवाज चल पिया है देखो धार्मिक स्थानां ते किदां लम्मे पै पै के मत्थे टेकन लगे होए हन... असीं लोग परमात्मा दी भग्ती दे सौखे तरीके लभन दी कोशिश कर रहे हां इस मनमुख भगती दा कोई फायदा नहीं होना.. डेरे विच वी जे अज्ज महाराज जी दियां जुत्तियां लिया के ऐत्थे रख दइये तां कोई विरला ही होवेगा जो उन्हानु मत्था न टेकना  चाहेगा... ओ भाई हासिल की होऊगा... कुझ नही... जो वी हासिल होना है नाम दी कमाई विचों हासल होना है... भजन सिमरन चों हासल होना है... जे सानू एह लगदा है कि भजन सिमरन करना बहुत औखा कम है तां कि ओ जो पिछले समयां विच सिद्ध ते जोगी लोग करदे रहे हन.... हठ योग, किने किने साल इक इक लत ते खड़े रहना, जटां वधा लैनिआं जिस्म ते भबूत मल के जंगलां विच रहना कि ओ सौखा है... 20-20 साल परीखया लै के शिष्य बनाना... कि असीं लोग उह परीखया पास कर सकदे हां... सानू कदर नहीं है... आसानी नाल मिल गये खजाने दी...परमात्मा ने 84 लख जूनां चों सिर्फ इंसान नूं ही विवेक दी ताकत बखशी है... सानू इक दूजे दी हर संभव मदद करन दी कोशिश करनी चाहिदी है.... परमार्थ सब कोल इको जिहा है किसे कोले घट नहीं ते किसे कोले वद नहीं जिना तुहाडे कोल है ऐत्थे स्टेज ते बैठन वालेआं कोल वी उना ही है...
लोड़ है कोशिश करन दी... शुरूआत करन दी... आप कहंदे हो कि ओह जानी जान है... तां फिर
एह वी समझ लवो कि उह तुहाडी रग रग तो वाकिफ है.. तुहाडी हर सोच तो वाकिफ है...
हर करनी दा हर सोच दा हिसाब देना पैणा है... जो मर्जी कर लवो किस्मत किसे दी बदली नहीं
जा सकदी.. ते नां ही संत महात्मा एह सब करन ही संसार विच मनुखी चोला धार के आंदे हन... अगर
ऐसा हुंदा तां देख लवो हुन तक किने किने चोटी दे महात्मा संसार विच आ चुके हन... हुन तक तां
एह संसार जरूर ही सुखां दी नगरी बन जाना सी... इस लयी सानू वी चाहिदा है कि असीं
जायदा तों जायदा समां भजन सिमरन विच लगाइये...अगला सतसंग 11 सितंबर नूं होवेगा होना ने वी
आना है बड़ी खुशी नाल आ सकदे हन... जी राधास्वामी जी...
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2. सिमरन सुबह 3 बजे उठकर, नहा धोकर करना चाहिए, नहाना इसलिए जरूरी है ताकि सुस्ती न आ सके, और कोई खास कारण नही है।

3. रात को भोजन संयम से करना चाहिए ताकि ज्यादा नींद न आये और हम रात को भी सिमरन कर सकें।

4. खाना हमेशा शाकाहारी और हल्का फुल्का होना चाहिए, ताकि शरीर बीमारियों से बचा रहे।

5. किसी भी प्रकार के नशे का सेवन वर्जित है।

6. प्रेम करें, मोह नहीं।

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