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Showing posts from July, 2016

"चश्मा" संभाल का ( राधा स्वामी जी)

एक बार बाबा चरण सिंह जी सत्संग कर रहे थे | बाबा जी का सत्संग समाप्त हुआ और उस सत्संग के बाद बाबा जी ने विदेश जाना था सत्संग करने के लिए | बाबा जी सेवादारो को और खुली सेवा वालों को दर्शन दे कर विदेश के लिए रवाना हो गए |
बयास में सेवा जोरों से चल रही थी बाबा जी जाने के लिए जहाज मैं बैठ गए | जहाज मैं बाबा जी के साथ और भी बहुत से लोग बैठे थे  | एक लड़की ने बाबा जी को पहचान लिया और उनके पास आ कर कहने लगी के आप वही हो न जो ब्यास मैं बैठते हो  | बाबा जी ने मुस्कुरा कर बोला के हाँ मैं वही हूँ  | बाबा जी ने काला चश्मा लगाया हुआ था  | उस लड़की ने बाबा जी से पूछा के बाबा जी आप ब्यास छोड़ कर सारी सांगत छोड़ कर इतनी दूर जा रहे हो जो संगत पीछे ब्यास मैं सेवा कर रही है उनका ख्याल कौन रखेगा  | Must read -
~ साखी माई हुसैनी जी की ( राधा सवामी जी ) ~ ज़िन्दगी के कडवे सच ( राधा सवामी जी ) ~ सच्चा प्रेम
तो बाबाजी ने बड़े पयार से कहा की बेटा ब्यास में ऐसी बहुत सी संगत है जो एक दूसरे का ख्याल रखती है   | उस लड़की ने कहा की बाबा जी आपका चश्मा बहुत ही अच्छा है क्या मैं इसे देख सकती हूँ  | बाबा जी ने अपना चश्मा उस…

साखी माई हुसैनी जी की ( राधा सवामी जी )

बड़े महाराज जी के समय की बात है के एक मुस्लिम औरत (माई हुसैनी) डेरे आया करती थी। एक बार उसने महाराज जी से कहा तब संगत इतनी नहीं हुआ करती थी। महाराज जी से बातचीत करना सरल था।उसने महाराज जी से कहा के महाराज मुझे खुदा का नाम बताएं। महाराज जी उसे देखते समझ गए के ये कोई मुस्लमान औरत है। महाराज जी ने कहा देखो बीबा आपके घर वाले ऐतराज़ करेंगे। उसने महाराज जी से कहा। महाराज मैंने क्या गलत कहा हैमैं आपसे खुदा का नाम ही तो पूछ रही हूँ। महाराज जी ने माई हुसैनी कीसच्ची लगन को देखते हुए। उसे खुदा का नाम भी बताया और साथ में दया औरप्रेम का तिनका भी दे दिया।माई हुसैनी के पिछले जनम के भक्ति के संस्कार थे।बिना नागा अभ्यास करने लगी। जब भी माई हुसैनी डेरे आया करती। सब सत्संगी महाराज जी से मिलने के लिए line में बैठते माई हुसैनी को वक़्त मिलता उस समय एक काशी का पंडित डेरे आया हुआ था। उसने सोचा के यह मुस्लमान औरत अनपढ़ औरत क्या बाबा जी से पूछती होगी। एक दिन माई हुसैनी बाबा जी से मिलने आई। तो परदे के साथ लगकर देख रहा है। देख रहा हैं और सुन रहा है। माई हुसैनी बाबा जी से ब्रह्म से ऊपर जाने की बातें कर रही है। सुन क…

ज़िन्दगी के कडवे सच ( राधा सवामी जी )

ज़िन्दगी के पाँच सच ~
सच नं. 1 -:
माँ के सिवा कोई वफादार नही हो सकता…!!!
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सच नं. 2 -:
गरीब का कोई दोस्त नही हो सकता…!!
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सच नं. 3 -:
आज भी लोग अच्छी सोच को नही,
अच्छी सूरत को तरजीह देते हैं…!!!
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सच नं. 4 -:
इज्जत सिर्फ पैसे की है, इंसान की नही…!!!
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सच न. 5 -:
जिस शख्स को अपना खास समझो….
अधिकतर वही शख्स दुख दर्द देता है…!!!
गीता में लिखा है कि....... अगर कोई इन्सान
बहुत हंसता है , तो अंदर से वो बहुत अकेला है अगर कोई इन्सान बहुत सोता है , तो अंदर से
वो बहुत उदास है अगर कोई इन्सान खुद को बहुत मजबूत दिखाता है और रोता नही , तो वो
अंदर से बहुत कमजोर है अगर कोई जरा जरा सी
बात पर रो देता है तो वो बहुत मासूम और नाजुक दिल का है अगर कोई हर बात पर
नाराज़ हो जाता है तो वो अंदर से बहुत अकेला
और जिन्दगी में प्यार की कमी महसूस करता है लोगों को समझने की कोशिश कीजिये ,जिन्दगी किसी का इंतज़ार नही करती , लोगों को एहसास कराइए की वो आप के लिए कितने खास है!!! 1. अगर जींदगी मे कुछ पाना हो तो,,, तरीके बदलो....…

3/7/16 का सतसंग ( राधा सवामी जी )

3/7/16... बाबा जी नें चेयर पे बैठ कर बिना पाठी जी के 50 मिनट का सतसंग किया, बाबा जी
8.15 पे स्टेज पे आ गये और 8.20 पे सतसंग शुरु कर दिया और 9.10 पे समाप्त कर राधास्वामी
बुलाई...  बाबा जी नें कहा...  अज कल असीं लोग
ग्रन्थ पोथियां पढना ही परमार्थ बना लिया है... संतों, महापुरुषों के किस्से कहानियों को सुन लिया
बस हो गयी परमात्मा की पूजा... जे हुन कोई बच्चा स्कूल दाखला लै लवे पर जो उत्थे पढाया जांदा
है उह सिखन दी कोशिश ही न करे बस मास्टर दी शक्ल देख के आ जावे...  जां स्कूल दी परिक्रमा
कर के आ जावे.. जां स्कुल किवें बनिया, किस ने बनाया एह हिस्ट्री ही पढी, सुनी जावे ते कि
उह पास हो जाऊगा...!! ओ भाई इस सब दा फायदा की है जे असीं जो सुनिया जो
पढिया जे उस ते अमल ही ना कीता सानू हासिल की होऊगा जो वी हासिल होना नाम दी कमाई चों हासिल होना है... भजन सिमरन चों हासिल होना है... असली कम असीं करना नहीं चाहंदे बस फालतू दे कमाल विच अपना कीमती वक्त खराब करन लगे होए हां मते किसे दे मन विच एह भुलेखा होवे कि जी
असीं नामदान लै लिया है जे भजन सिमरन नां वी कीता तां वी अगला जन्म मनुख जन्म ही
मिलूगा अपने मन विच…