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Who Am I ? What is Self Realization ? - Saurabh Sharma

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WHO AM I?
“Naa kar bandeya meri-meri, Naa teri naa meri, Chaar din ka mela yeh duniya,  Fir miti ki dheeri” Baba Bulleh Shah
Often we heard our master saying “self-realization precedes god realization”. But what does self-realization really constitute of. Is it something beyond us to fathom or is it very much innate within us. There are tons of questions which often develop in our mind. The most obvious being ‘do I really need to know myself’. As if these many years are not enough for me to realize ‘who am I’ or ‘am I laboring under wrong assumptions, till yet’. Does such realization take me to the path where I really ought to be? These are few of such anomalies which are quite often prevalent inside us.

Even though this journey of self-realization is often marred with lot of mysteries, yet, it is instilled with a clear path. But before dwelling into this path/journey, let’s appreciate its importance in our life. Again, let us take the basis from master’s teaching wherein he makes us realize…

भगवान की भक्ति क्यों ? Why to Pray God ? Radha Soami Sakhi

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🌹किसने दिया ?🌹
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 राजा अकबर ने बीरबल से पूछा कि तुम लोग सारा दिन भगवान की भक्ति करते हो, सिमरन करते हो ,उसका नाम लेते हो।
 आखिर भगवान तुम्हें देता क्या है ?
बीरबल ने कहा कि महाराज मुझे कुछ दिन का समय दीजिए ।
बीरबल एक बूढी भिखारन के पास जाकर कहा कि मैं तुम्हें पैसे भी दूँगा और रोज खाना भी खिलाऊंगा, पर तुम्हें मेरा एक काम करना होगा ।  
बुढ़िया ने कहा ठीक है - जनाब  
बीरबल ने कहा कि आज के बाद 
-अगर कोई तुमसे पूछे कि क्या चाहिए तो कहना अकबर, 
-अगर कोई पूछे किसने दिया तो कहना अकबर शहंशाह ने ।   
वह भिखारिन अकबर को बिल्कुल नहीं जानती थी, पर वह रोज-रोज हर बात में अकबर का नाम लेने लगी ।  
कोई पूछता -
-क्या चाहिए तो वह कहती अकबर,  
-कोई पूछता किसने दिया, तो कहती अकबर मेरे मालिक ने दिया है । 
धीरे धीरे यह सारी बातें अकबर के कानों तक भी पहुँच गई ।  
वह खुद भी उस भिखारन के पास गया और पूछा यह सब तुझे किसने दिया है ? 
तो उसने जवाब दिया, मेरे शहंशाह अकबर ने मुझे सब कुछ दिया है ।
फिर पूछा और क्या चाहिए ? 
तो बड़े अदब से भिखारन ने कहा - अकबर का दीदार, मैं उसकी हर रहमत का शुक्राना अदा करना चाहती हूँ, बस…

Dera beas ki video| डेरा ब्यास की वीडियो। कैसा माहौल होता है ब्यास में

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ब्यास का माहौल, जरूर देखें ये वीडियो और शेयर भी जरूर करें ब्यास में दिन की शुरुआत सायरन से होती है, जो संगत जो अमृतवेले सिमरन करने के लिए जगाता है।
बाकी वीडियो में देखें।



प्रार्थना के चार शब्द। Four Words of Prayer। Radha Soami Sakhi

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*एक जादूगर* जो मृत्यु के करीब था, मृत्यु से पहले अपने बेटे को चाँदी के सिक्कों से भरा थैला देता है और बताता है की "जब भी इस थैले से चाँदी के सिक्के खत्म हो जाएँ तो मैं तुम्हें एक प्रार्थना बताता हूँ, उसे दोहराने से चाँदी के सिक्के फिर से भरने लग जाएँगे । 

उसने बेटे के कान में चार शब्दों की प्रार्थना कही और वह मर गया । अब बेटा चाँदी के सिक्कों से भरा थैला पाकर आनंदित हो उठा और उसे खर्च करने में लग गया । वह थैला इतना बड़ा था की उसे खर्च करने में कई साल बीत गए, इस बीच वह प्रार्थना भूल गया । जब थैला खत्म होने को आया तब उसे याद आया कि "अरे! वह चार शब्दों की प्रार्थना क्या थी ।" उसने बहुत याद किया, उसे याद ही नहीं आया ।

अब वह लोगों से पूँछने लगा । पहले पड़ोसी से पूछता है की "ऐसी कोई प्रार्थना तुम जानते हो क्या, जिसमें चार शब्द हैं । पड़ोसी ने कहा, "हाँ, एक चार शब्दों की प्रार्थना मुझे मालूम है, "ईश्वर मेरी मदद करो ।" उसने सुना और उसे लगा की ये वे शब्द नहीं थे, कुछ अलग थे । कुछ सुना होता है तो हमें जाना-पहचाना सा लगता है । फिर भी उसने वह शब्द बहुत बार दोहराए, ले…

खोटा सिक्का या खरा सिक्का। Beautiful saakhi। Radha Soami Sakhi

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एक मालिक का प्यारा शख्श जिसका नाम करतार था....

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एक मालिक का प्यारा शख्श जिसका नाम करतार था वह छोले बेचने का कारज करता था उसकी पत्नी रोज सुबह-सवेरे उठ छोले बनाने में उसकी मदद करती थी एक बार की बात है कि एक फकीर जिसके पास खोटे सिक्के थे उसको सारे बाजार में कोई वस्तु नहीं देता हैं तो वह करतार के पास छोले लेने आता हैं करतार ने खोटा सिक्का देखकर भी उस मालिक के प्यारे को छोले दे दिए।
ऐसे ही चार-पांच दिन उस फकीर ने करतार को खोटे सिक्के देकर छोले ले लिए और उसके खोटे सिक्के चल गए और जब सारे बाजार में अब यह बात फैल गयी की करतार तो खोटे सिक्के भी चला लेता हैं पर करतार लोगों की बात सुनकर कभी जबाव नहीं देते थे..
और अपने मालिक की मौज में खुश रहते थे।
एक बार जब करतार अरदास पढ़कर उठे तो अपनी पत्नी से बोले ---"क्या छोले तैयार हो गए..??"
पत्नी बोली ---"आज तो घर में हल्दी -मिर्च नहीं थी और मैं बाजार से लेने गयी तो सब दुकानदारों ने कहा कि--यह तो खोटे सिक्के हैं और उन्होंने सामान नहीं दिया।"

Also Read - प्रार्थना का प्रभाव

पत्नी के शब्द सुनकर करतार मालिक की याद में बैठ गए और मा…

Guru Angad Dev Ji ki sakhi । गुरु अंगद देव जी और रूप सिंह जी की साखी ‘शुकराना’

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रूप सिंह बाबा ने अपने गुरु अंगद देव जी की बहुत सेवा की । 20 साल सेवा करते हुए बीत गए। गुरु रूप सिंह जी पर प्रसन्न हुए और कहा मांगो जो माँगना है। रूप सिंह जी बोले गुरुदेव मुझे तो मांगने ही नहीं आता। गुरु के बहुत कहने पर रूप सिंह जी बोले मुझे एक दिन का वक़्त दो घरवाले से पूछ के कल बताता हूं। घर जाकर माँ से पूछा तो माँ बोली जमीन माँग ले। मन नहीं माना। बीवी से पुछा तो बोली इतनी गरीबी है पैसे मांग लो। फिर भी मन नहीं माना। छोटी बिटिया थी उनको उसने बोला पिताजी गुरु ने जब कहा है कि मांगो तो कोई छोटी मोटी चीज़ न मांग लेना। इतनी छोटी बेटी की बात सुन के रूप सिंह जी बोले कल तू ही साथ चल गुरु से तू ही मांग लेना। अगले दिन दोनो गुरु के पास गए। रूप सिंह जी बोले गुरुदेव मेरी बेटी आपसे मांगेगी मेरी जगह। वो नन्ही बेटी बहुत समझदार थी। रूप सिंह जी इतने गरीब थे के घर के सारे लोग दिन में एक वक़्त का खाना ही खाते। इतनी तकलीफ होने के बावजूद भी उस नन्ही बेटी ने गुरु से कहा: गुरुदेव मुझे कुछ नहीं चाहिए।
आप के हम लोगो पे बहुत एहसान है। आपकी बड़ी रहमत है। बस मुझे एक ही बात चाहिए कि, “आज हम दिन में एक बार ही खाना खाते हैं। अगर कभी आगे ए…

सत्संग बड़ा या तप। Satsang bada ya Tap

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।। सत्संग ।। ------ सत्संग बड़ा है या तप ------ एक बार विश्वामित्र जी और वशिष्ठ जी में इस बात‌ पर बहस हो गई,
कि सत्संग बड़ा है या तप? विश्वामित्र जी ने कठोर तपस्या करके ऋध्दी-सिध्दियों को प्राप्त किया था,
इसीलिए वे तप को बड़ा बता रहे थे। जबकि वशिष्ठ जी सत्संग को बड़ा बताते थे। वे इस बात का फैसला करवाने ब्रह्मा जी के पास चले गए। उनकी बात सुनकर ब्रह्मा जी ने कहा- मैं सृष्टि की रचना करने में व्यस्त हूं।
आप विष्णु जी के पास जाइये।
विष्णु जी आपका फैसला अवश्य कर देगें। अब दोनों विष्णु जी के पास चले गए।
विष्णु जी ने सोचा- यदि मैं सत्संग को बड़ा बताता हूं तो विश्वामित्र जी नाराज होंगे,
और यदि तप को बड़ा बताता हूं तो वशिष्ठ जी के साथ अन्याय होगा।
इसीलिए उन्होंने भी यह कहकर उन्हें टाल दिया,
कि मैं सृष्टि का पालन करने मैं व्यस्त हूं।
आप शंकर जी के पास चले जाइये। अब दोनों शंकर जी के पास पहुंचे।
शंकर जी ने उनसे कहा- ये मेरे वश की बात नहीं है।
इसका फैसला तो शेषनाग जी कर सकते हैं। अब दोनों शेषनाग जी के पास गए।
शेषनाग जी ने उनसे पूछा- कहो ऋषियों! कैसे आना हुआ। वशिष्ठ जी ने बताया- हमारा फैसला कीजिए,
कि तप बड़ा है या सत्संग ब…